फर्ज कीजिए कि शिल्पा शेट्टी की नाक वैसी ही होती, जैसी पहले थी। तो क्या राज कुंदर जैसा गाँठ का पूरा दूल्हा उन्हें मिलता? अगर शेखर सुमन चेहरे की झुर्रियाँ नहीं मिटवाते, तो क्या उन्हें टीवी पर "जजगिरी" का काम मिलता? राखी सावंत अगर प्लास्टिक सर्जरी से अपने शरीर को शेप में नहीं करातीं, तो क्या उन्हें फिल्मों में आइटम नंबर करने को मिलते? मोटी-बेडौल कमर वाली लड़की को कौन निर्माता निर्देशक अपनी फिल्म में लेता। सुंदर दिखने का आत्मविश्वास व्यक्ति को और ज्यादा सुंदर बना देता है।
अपनी पहले वाली नाक के साथ शिल्पा शेट्टी राज कुंदर से सहज होकर बात तक नहीं कर पातीं, सगाई तक पहुँचना तो दूर की बात है। सुंदर दिखने से पहले एक उलझन यह रहती है कि कहीं मैं किसी को खराब तो नहीं लग रहा हूँ। रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा है कि कुरुपता एक किस्म की हिंसा है।
इन दिनों लोगों में प्लास्टिक सर्जरी के द्वारा अपने आपको सुंदर बनाने का चलन खूब बढ़ गया है। इसके खिलाफ कुछ लोग कहते हैं कि भगवान ने आपको जैसा बनाया है, वैसे ही रहिए। क्यों भगवान के काम में हस्तक्षेप करते हैं? मगर भगवान जिन्हें लूला-लंगड़ा पैदा करता है, क्या वो इलाज नहीं कराते? इस तर्क के साथ तो बात आदिम युग तक जाती है।
सोचिए, जब भगवान ने इंसान को ऐसे ही पैदा किया, तो वो कपड़े क्यों पहनता है? अनाज और सब्जियों को पकाकर खाना क्या प्रकृति से ऊपर जाना नहीं है? भगवान ने टाँगें दी हैं, तो पहियों का अविष्कार क्यों किया गया? वाहन में हम क्यों बैठते हैं? कुछ लोग हर तकनीक के खिलाफ रहते हैं। सच बात तो यह है कि इंसान प्रकृति की निर्दोष रचना नहीं है। अगर प्रकृति के काम में सुधार कर दिया जाए, तो क्या गलत है? क्या इंसान प्रकृति का हिस्सा नहीं है? किस घमंड से इंसान ने यह सोच लिया कि वह प्रकृति से अलग है? लाचार किस्म के संतोषी लोग मान सकते हैं, पर उद्यमी व्यक्ति यह बात नहीं मानेगा कि यदि प्रकृति ने उसे कुरूप बनाया है, तो वो कुरूप ही रहे।
शिल्पा शेट्टी, शेखर सुमन और हल्की-फुल्की प्लास्टिक सर्जरी कराने वाले इस बात की मिसाल हैं कि किस तरह तकनीक का लाभ लेना चाहिए। जबकि माइकल जैक्सन इस बात का सबक हैं कि अति हर चीज की बुरी होती है। फिल्म स्टारों जैसे बाल कटाने और कपड़े सिलाने का चलन तो पुराना है, अब लोग फिल्म स्टार जैसा शरीर और नैन-नक्श चाहते हैं। प्लास्टिक सर्जरी को अब कॉस्टमेटिक सर्जरी भी कहा जाने लगा है।
सुंदर दिखना इंसान की बुनियादी इच्छाओं में से एक है। अनेक शोधों में बात उभरकर सामने आई है कि सुंदर लोगों को व्यावसायिक सफलता भी अपेक्षाकृत अधिक और आसानी से मिलती है। तो इंसान सुंदर क्यों न हो? शिल्पा शेट्टी के भावी विवाह का श्रेय बहुत कुछ उनके उस प्लास्टिक सर्जन को जाता है जिसने उनकी चबाए हुए च्युइंगम जैसी नाक को सुंदर-सुघड़ बना दिया है।