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राशिफल देखकर घर से निकलने वाले...

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व्हाट्स योअर राशि
बचपन की हद तक तो यह बात चल जाती है, कि अमुक झाड़ की पत्तियाँ किताब में रखने से विद्या आती है, परीक्षा में सफलता मिलती है, मगर एक उम्र के बाद अगर कोई युवा सोचता है कि मुझ पर अमुक-अमुक ग्रह का साया है और मूँगे की अँगूठी पहनने से, शनिवार के दिन तेल दान करने से मेरा भला होगा, तो वह युवा दरअसल युवा नहीं है। दिमाग से वह या तो अभी भी बच्चा है या बच्चे से सीधे बूढ़ा हो गया है। युवा होने का मतलब केवल शारीरिक अवस्था नहीं है, आदमी में विरोध करने का साहस, विद्रोह करने का हौसला होना चाहिए। परंपराओं पर सवाल उठाना आना चाहिए। हमारे बहुत से युवा विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई करते हैं मगर दिन शुरू करते हैं अपनी राशि अखबार में देखकर। ऐसे युवा क्या वाकई युवा हैं? वे ज्योतिषियों के पास जाते हैं और सोचते हैं कि वशीकरण मंत्र का जाप करना चाहिए।

आशुतोष गोवारीकर की फिल्म "वाट्स योर राशि" कल लग रही है। क्या ये फिल्म युवाओं को अंधविश्वास में धकेलेगी? जो सिंगल लाइन स्टोरी अभी सबको पता है, उससे कुछ पता नहीं चलता कि फिल्म अंधविश्वास का समर्थन करेगी या विरोध। आशुतोष गोवारीकर ने अभी तक जैसी फिल्में बनाई हैं, विश्वास होता है कि वे अपना मत अंधविश्वास के समर्थन में नहीं देने वाले। उनकी ये फिल्म लाइट मूड की कॉमेडी है। अंधविश्वास पर कोई सवाल उठाना फिल्म का मकसद है भी नहीं। जहाँ तक प्रियंका चोपड़ा का सवाल है उनका कहना है कि वे राशिफल पढ़ती ज़रूर हैं, पर यकीन नहीं करतीं केवल आनंद लेने के लिए ही पढ़ती हैं। मगर ये शायद बहाना है। अगर आप विश्वास नहीं करते, तो अपनी ही राशि क्यों पढ़ते हैं? मनोरंजन के लिए किसी की भी राशि पढ़ी जा सकती है। मगर यदि वाकई कोई सबकी राशि पढ़ लें, तो उसका सारा भरम टूट सकता है। बारह राशियों के बारे में जो लिखा जाता है, वो अदल-बदल कर बरसों चलाया जा सकता है। आज जो मीन राशि के विषय में लिखा है, उसे पलटकर तुला में डाल दो, कल तुला का उठाकर मकर में डाल दो...। केवल राशिफल ही एक ऐसी चीज़ है जो "नित नूतन" है। एक पत्रिका वाले ने ज्योतिष को पैसे नहीं दिए। ज्योतिष ने आकर ताज़ा राशिफल नहीं लिखा। मजबूरी में संपादक ने पुराना राशिफल उठाया और मीन का फल तुला में और तुला का वृषभ में डालकर छाप दिया। फिर जब तक वह पत्रिका छपी, तब तक राशिफल ऐसे ही छपता रहा।

आशुतोष गोवारीकर की ये फिल्म तीन घंटे तीस मिनट की है। आशुतोष बड़ी ही नहीं लंबी फिल्में भी बनाते हैं। प्रियंका के बारह लुक शायद वक्त का पता न लगने दें। रॉनी स्क्रूवाला इस फिल्म के निर्माता हैं। इन दिनों लगभग हर दूसरी महत्वपूर्ण फिल्म से उनका नाम जुड़ा होता है। इस हफ्ते की सबसे महत्वपूर्ण फिल्म यही है। पिछले हफ्ते लगी "वॉन्टेड" ने रफ्तार पकड़ ली है जिससे कर्ज मे डूबे बोनी कपूर को ऑक्सीजन मिल गई है। मगर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आशुतोष गोवारीकर की ये फिल्म राशिफल देखने वालों पर हल्का-सा भी व्यंग्य करेगी? हमारे युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिए जाने की ज़रूरत हमेशा से रही है।

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