हिंदी फिल्मों के जानेमाने गायक शान अपनी नई और छठी एलबम लेकर आ रहे हैं। इसमें उन्होंने गायन के अलावा छह गीत लिखे हैं तथा उन्हें संगीतबद्ध भी किया है।
गैर फिल्मी एलबम से ही गायन करियर की शुरूआत करने वाले शान का कहना है कि वे हर एलबम के बाद सोचते हैं कि यह उनकी आखिरी एलबम होगी, लेकिन बाद में लगता है कि एक और एलबम बना सकते हैं।
30 सितंबर को अपनी 37वीं वर्षगाँठ मनाने वाले शान ने कहा, ‘‘हर एलबम के बाद लगता है कि अब किसी और एलबम पर काम नहीं करुँगा, लेकिन बाद में यह भी महसूस होता है कि अभी तो एक और एलबम के गीतों को आवाज दे सकता हूँ।’’ अब तक शान के पाँच गैर फिल्मी एलबम जारी हो चुके हैं। इनमें काफी लोकप्रिय हुए ‘तनहा दिल’ के अलावा क्यू फंक, लव स्टोरी, लव ओ लॉजी और अकसर हैं।
बचपन से ही जिंगल और गीत गाने वाले शान ने सबसे पहले 1989 में 15 साल की उम्र में फिल्म ‘परिंदा’ के लिए एक गीत की पंक्ति गाई थी। औपचारिक तौर पर उनकी पहली गायन प्रस्तुति एलबम ‘क्यू फंक’ थी, जो 1995 में जारी हुई थी।
गायन के क्षेत्र में कई सम्मानों से नवाजे जा चुके इस गायक को वर्ष 2000 में ‘तनहा दिल’ के लिए एमटीवी एशिया म्यूजिक अवार्ड प्रदान किया गया था। बॉलीवुड की कई फिल्मों के लिए कर्णप्रिय गीतों को आवाज दे चुके शान को ‘फना’ के गीत ‘चाँद सिफारिश’ और ‘साँवरिया’ के गीत ‘जब से तेरे नैना’ के लिए सर्वश्रेष्ठ गायक का फिल्मफेयर और जी सिने अवार्ड दोनों मिले थे। वे अब तक देश-विदेश में कई कंसर्ट कर चुके हैं।
संगीत पर आधारित रियलिटी शो ‘सारेगामापा’ और बाद में ‘वॉइस ऑफ इंडिया’ के मेजबान रहे शान का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रमों से सामने आने वाली प्रतिभाओं को केवल पार्श्व गायन को ही लक्ष्य नहीं बनाना चाहिए।
शान के मुताबिक, ‘‘इन गायकों के लिए कई मंच और अवसर हैं इसलिए केवल पार्श्व गायन को मकसद नहीं बनाना चाहिए।’’ उन्होंने यह भी माना कि इस तरह के रियलिटी शो में एसएमएस के जरिये वोटिंग कराना फैसले का सही तरीका नहीं है।
शान ने पहले कहा था कि यदि ‘वॉइस ऑफ इंडिया’ जैसे कार्यक्रमों में प्रतिभागियों की प्रतिभा का आँकलन केवल दर्शकों के एसएमएस से ही होगा और इसमें जजों के निर्णय का कोई महत्व नहीं होगा तो वह इनकी एंकरिंग छोड़ देंगे।