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कियारा आडवाणी का सफर: प्लेस्कूल की ‘स्टेज’ से बॉलीवुड तक, अब खुद की कहानी खुद लिख रही हैं एक्ट्रेस

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कियारा आडवाणी का सफर: प्लेस्कूल की ‘स्टेज’ से बॉलीवुड तक, अब खुद की कहानी खुद लिख रही हैं एक्ट्रेस
आज की बॉलीवुड दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली कियारा आडवाणी अब सिर्फ एक खूबसूरत चेहरा नहीं, बल्कि एक समझदार और आत्मविश्वासी कलाकार के रूप में उभर चुकी हैं। ग्राज़िया इंडिया के लेटेस्ट कवर इंटरव्यू में कियारा ने अपने सफर के उस दौर को साझा किया, जहां वह सिर्फ रोल नहीं निभा रहीं, बल्कि अपनी कहानी खुद लिख रही हैं। यह बातचीत उनके करियर का एक ऐसा पड़ाव दिखाती है, जहां अनुभव, आत्मविश्वास और स्पष्ट सोच का मेल नजर आता है।
 
कियारा के लिए एक्टिंग हमेशा कोई दूर का सपना नहीं था, बल्कि बचपन से ही उनके अंदर यह चाह थी। वह मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मैं हमेशा से एक एक्ट्रेस बनना चाहती थी। मेरे माता-पिता को भी जल्दी समझ आ गया था कि मेरे अंदर यह ‘कीड़ा’ है।” हालांकि उनके माता-पिता ने उन्हें पहले पढ़ाई पूरी करने की सलाह दी, लेकिन इसी बीच उनके पिता ने उन्हें एक रूटीन अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिसने उन्हें उनकी मां के प्लेस्कूल तक पहुंचा दिया।
 

प्लेस्कूल बना पहला मंच

कियारा अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहती हैं, “मैंने उस प्लेस्कूल को अपना छोटा सा स्टेज बना लिया था। वे छोटे बच्चे मेरे पहले दर्शक थे और सबसे प्यारे भी, क्योंकि वे हर छोटी चीज पर मुस्कुरा देते थे।” यही छोटे-छोटे अनुभव उनके अंदर आत्मविश्वास और धैर्य लेकर आए। वह मानती हैं कि इन्हीं पलों ने उन्हें मजबूत बनाया और आगे बढ़ने की भूख कभी खत्म नहीं होने दी। “इसने मुझे ज्यादा मजबूत और रेज़िलिएंट बनाया,” वह कहती हैं।

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‘डायरेक्टर की एक्टर’ बनने की सोच

फिल्म इंडस्ट्री में खुद को साबित करने के बाद भी कियारा खुद को एक ‘डायरेक्टर की एक्टर’ मानती हैं। वह कहती हैं, “एक एक्टर के लिए डायरेक्टर के साथ कनेक्शन सबसे जरूरी होता है। जब आप गहरे और संवेदनशील इमोशन्स निभाते हैं, तो भरोसा और सहजता बहुत मायने रखती है।” उनकी यह सोच बताती है कि वह सिर्फ कैमरे के सामने नहीं, बल्कि पूरी क्रिएटिव प्रोसेस का हिस्सा बनकर काम करती हैं।
 

‘कबीर सिंह’ से ‘गिल्टी’ तक: रिस्क लेने का साहस

कबीर सिंह जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के बाद भी कियारा ने आसान रास्ता नहीं चुना। उन्होंने गिल्टी जैसी अलग और बोल्ड कहानी को चुना। वह कहती हैं, “मैंने ‘गिल्टी’ इसलिए चुनी क्योंकि मुझे उस कहानी पर भरोसा था। मैंने वर्कशॉप्स कीं, सर्वाइवर्स से बात की और खुद को पूरी तरह उस किरदार में डुबो दिया।” उनके मुताबिक, एक एक्टर के लिए ईगो से ज्यादा जरूरी है ईमानदारी और सीखने की इच्छा। “मेरे अंदर कोई ईगो नहीं है, मैं अपने डर और सवाल खुलकर रखती हूं,” वह साफ कहती हैं।
 

मुश्किल किरदारों ने बनाया और मजबूत

कियारा ने अपने करियर में कई ऐसे रोल किए हैं जिन्होंने उन्हें भावनात्मक और शारीरिक दोनों स्तर पर चुनौती दी। एक कन्नड़ फिल्म का जिक्र करते हुए वह कहती हैं, “उस रोल ने मुझे सिर्फ एक एक्टर के तौर पर नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी बहुत कुछ सिखाया। यह एक भावनात्मक सफर था।”
 

“अब मैं एक टाइग्रेस बन चुकी हूं”

जिंदगी को लेकर अपने बदले नजरिए पर कियारा का जवाब बेहद दिलचस्प है। वह हंसते हुए कहती हैं, “अब मैं एक टाइग्रेस बन चुकी हूं। जिंदगी को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल गया है। ऐसा लगता है कि कुछ भी मायने नहीं रखता और साथ ही सब कुछ मायने रखता है।” यह लाइन उनके आत्मविश्वास और परिपक्वता को बखूबी दर्शाती है।
 

भीतर की वही लड़की आज भी जिंदा है

इतनी सफलता और पहचान के बावजूद कियारा खुद को जमीन से जुड़ा हुआ मानती हैं। वह कहती हैं, “मेरे अंदर आज भी वही छोटी सी लड़की है, जो सपने देखती थी।” यही सादगी और ईमानदारी उन्हें बाकी स्टार्स से अलग बनाती है। कियारा आडवाणी की यह कवर स्टोरी सिर्फ एक इंटरव्यू नहीं, बल्कि एक ऐसी यात्रा है, जो बताती है कि असली सफलता खुद को समझने और स्वीकार करने में है।

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