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मान लो कि 'फैन' में ही दम नहीं है...

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फैन
शाहरुख खान की 'फैन' बॉक्स ऑफिस पर असफल रही है। जैसा कि हर क्षेत्र में होता है, असफलता की चीर-फाड़ की जाती है। कई तरह के कारण सामने आ रहे हैं। किसी का कहना है कि फिल्म में 'जबरा' गाना नहीं है तो कोई हीरोइन के न होने को दोषी मान रहा है। क्या हीरोइन होती तो फिल्म सफल हो जाती? क्या 'जबरा' होता तो फिल्म का आंकड़ा दो सौ करोड़ पार हो जाता? 
 
एक और कारण कुछ लोगों ने बताया है कि शाहरुख की फिल्म का बहिष्कार हुआ है, लिहाजा यह फिल्म असफल रही है। यह बात बड़ी आसान लगती है क्योंकि कितने लोगों ने बहिष्कार किया है इसकी संख्या का पता लगाना भूसे के ढेर से सुई खोजने के समान है।
 
'फैन' के समय शाहरुख की फिल्म के बहिष्कार की मुहिम एकदम ठंडी पड़ी हुई थी। 'दिलवाले' के समय जरूर उन लोगों में आक्रोश था जो असहिष्णुता संबंधी शाहरुख के बयान से नाराज थे। विरोध हुआ। प्रदर्शन हुआ। बहिष्कार करने वाले पोस्टर लगाए गए। सिनेमाघरों में पुलिस का पहरा लगाया गया। इसके बावजूद फिल्म ने भारत में 140 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। 
'फैन' को लेकर इतना विरोध नहीं है इसके बावजूद फिल्म सौ करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही है। सही और स्पष्ट बात तो यह है कि 'फैन' में ही दम नहीं है। खराब फिल्म है ये। न उन दर्शकों के लिए है जो मसाला फिल्म पसंद करते हैं और न ही 'हटके' देखने वालों के लिए है। 

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