Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

'टॉम बॉय' लुक में क्यों रहती हैं गरबा क्वीन फाल्गुनी पाठक?

हमें फॉलो करें 'टॉम बॉय' लुक में क्यों रहती हैं गरबा क्वीन फाल्गुनी पाठक?

WD Entertainment Desk

, रविवार, 12 मार्च 2023 (10:32 IST)
गरबा क्वीन के नाम से मशहूर फाल्गुनी पाठक 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। गुजराती फैमिली से ताल्लुक रखने वाली फाल्गुनी का पालन-पोषण मुंबई में हुआ है। फाल्गुनी अपने माता-पिता की पांचवीं संतान है। फाल्गुनी के पेरेंट्स 4 बेटियों के जन्म के बाद एक बेटे की उम्मीद कर रहे थे लेकिन 5वीं संतान भी बेटी हुई। फाल्गुनी कभी लड़कियों की तरह नहीं रही। वो हमेशा लड़कों की तरह रहती है। 

 
लड़कों की तरह पहनावा रखने वाली फाल्गुनी ने अभी तक शादी भी नहीं की। फाल्गुनी ने 10 साल की उम्र में अपना पहला गाना अल्का याग्निक के साथ रिकॉर्ड किया था। 90 के दौर में फाल्गुनी का गाना हर किसी की जुबान पर हुआ करता था और हर फंक्शन पर लोग बड़े शौक से इसे बजाया करते थे। 
 
webdunia
1987 से फाल्गुनी ने डांडिया नाइट्स में गाना शुरू किया। फाल्गुनी पाठक सिर्फ सिंगर ही नहीं बल्कि लाइव परफॉर्मर और म्यूजिक कंपोजर भी हैं। उनका संगीत गुजरात के पारंपरिक संगीत पर आधारित है और उसी से प्रेरित है। उनका पहला एल्बम 1998 में रिलीज हुआ था। इसी के साथ उन्होंने कई सारे बॉलीवुड गाने भी रिकॉर्ड किए है। उन्होंने भारत सहित विदेशों में कई कार्यक्रम किए। 
 
आपकों जानकर हैरानी होगी की करियर की शुरुआत में फाल्गुनी की पिटाई भी हुई है। एक इंटरव्यू में फाल्गुनी ने बताया था कि बचपन से ही वह रेडियो सुनने की शौकीन थी। यहीं से सिंगिंग में उनकी दिलचस्पी हुई थी और वह 9-10 साल की थी जब उन्होंने पहली परफॉर्मेंस दी थी और जब ये बात पिता को पता चली तो उन्होंने बहुत डांटा और पिटाई भी की थी। 
 
फाल्गुनी पाठक ने 1994 में 'ता थैया' नाम से अपना बैंड बनाया। इस बैंड के जरिए उन्होंने कई देशों में परफॉर्म किया। इसके लिए फाल्गुनी ने 5 साल की कड़ी मेहनत की। इसके बाद उनका पहला एल्बम साल 1998 में रिलीज हुआ और धीरे-धीरे उनकी आवाज का जादू हर जगह छाने लगा।
Edited By : Ankit Piplodiya

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'