Publish Date: Sun, 15 Feb 2026 (12:15 IST)
Updated Date: Sun, 15 Feb 2026 (12:16 IST)
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो केवल सेल्युलाइड पर दर्ज नहीं होते, बल्कि दर्शकों की आत्मा में बस जाते हैं। 'बाहुबली' फ्रैंचाइजी का वह दृश्य, जहां सुपरस्टार प्रभास एक विशाल शिवलिंग को अपने कंधों पर उठाकर गर्जना करते झरने के नीचे स्थापित करते हैं, एक ऐसा ही जादुई और राजसी क्षण है।
आज महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर, आइए उस दृश्य की दिव्यता को फिर से महसूस करते हैं जिसने प्रभास को 'पैन-इंडिया सुपरस्टार' से ऊपर उठाकर एक सांस्कृतिक प्रतीक बना दिया। वह दृश्य केवल शारीरिक बल का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि वह पुत्र के अगाध प्रेम और भक्त की निश्चल श्रद्धा का संगम था।
जब प्रभास ने अपने चेहरे पर एक दैवीय मुस्कान लिए उस भारी-भरकम शिवलिंग को उठाया, तो सिनेमाघरों में तालियों की गड़गड़ाहट नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ था। दूधिया झरने की गिरती धाराओं के बीच शिवलिंग का अभिषेक और उस पर प्रभास का वह निडर व्यक्तित्व—इस तालमेल ने पर्दे पर 'शिवत्व' को जीवंत कर दिया।
भस्म, राख और 'बाहुबली 2' का रौद्र रूप
'बाहुबली: द बिगनिंग' ने जहां शक्ति दिखाई, वहीं 'बाहुबली 2: द कन्क्लूजन' ने उस भक्ति को पूर्णता दी। पवित्र राख (भस्म) से लिपटे प्रभास और शिवलिंग के इर्द-गिर्द घूमती उनकी वह रहस्यमयी और शक्तिशाली छवि आज भी रोंगटे खड़े कर देती है। राजामौली के विजन और प्रभास के समर्पण ने मिलकर इस फ्रैंचाइजी को केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि 'शिव-भक्ति' का एक आधुनिक महाकाव्य बना दिया।
प्रभास: आधुनिक सिनेमा के 'नंदी' और 'शिवा'
प्रभास का कद और उनकी कद-काठी उस दृश्य के लिए इतनी सटीक थी कि आज भी जब महाशिवरात्रि आती है, तो करोड़ों प्रशंसकों के मन में सबसे पहले 'बाहुबली' के उसी 'शिवा' की छवि उभरती है। इस एक सीक्वेंस ने वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति की भव्यता का परचम लहराया।
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