Publish Date: Sat, 17 Apr 2021 (16:44 IST)
Updated Date: Tue, 04 Oct 2022 (12:16 IST)
शाहरुख खान अभिनीत फिल्म चक दे इंडिया वर्ष 2007 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म का निर्देशन शिमीत अमीन ने किया था। शिमित ने इस फिल्म से एक बेहतर निर्देशक की उम्मीद जगाई थी, लेकिन चक दे के बाद वे गुमनाम से हो गए। शाहरुख खान ने इस मूवी में कबीर खान नामक हॉकी कोच और खिलाड़ी का किरदार निभाया था। एक फाइनल में उसकी गलती से भारतीय टीम पाकिस्तान से हार जाती है। कबीर को मुस्लिम होने के कारण दोषी माना जाता है और कबीर गुमनामी के अंधेरों में खो जाता है। कुछ वर्ष बाद कबीर भारतीय महिला हॉकी टीम का कोच बनने का प्रस्ताव रखता है। बड़ी मुश्किलों के बाद उसे चुन लिया जाता है। कबीर के सामने कई चुनौतियां आती हैं जिनका सामना कर वे टीम को विजेता बना देता है।
शाहरुख खान ने यह रोल इतनी संजीदगी के साथ निभाया कि यह उनके करियर की बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है। शाहरुख ने अपनी रोमांटिक छवि के विपरीत यह फिल्म की थी। जब शाहरुख ने इस फिल्म का प्रस्ताव स्वीकार किया था तो बॉलीवुड के तथाकथित पंडितों ने उनके इस निर्णय को गलत बताया था। कहा कि इसमें उनकी कोई हीरोइन नहीं है। उन पर कोई गाना नहीं है। यहां तक की फिल्म के रिलीज होने के बाद फिल्म की आलोचना भी की थी, लेकिन शाहरुख ने सभी को गलत साबित किया।
आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि शाहरुख इस फिल्म के लिए पहली पसंद नहीं थे। चक दे इंडिया उनके पहले सलमान खान को ऑफर की गई थी। सलमान को स्क्रिप्ट पसंद आई। हां भी कहा, लेकिन फिल्म के निर्देशक से उनके मतभेद हो गए और उन्होंने यशराज फिल्म्स की यह फिल्म से अलग होने का निर्णय लिया।
सलमान के बाद शाहरुख को फिल्म ऑफर की गई। उस समय वे करण जौहर की फिल्म कभी अलविदा न कहना में व्यस्त थे, इसलिए उन्होंने 'चक दे इंडिया' करने से मना कर दिया। दोबारा विचार करने के लिए कहा गया तो वे मान गए। दरअसल हॉकी से उनको बेइंतहा मोहब्बत है और ये कॉलेज जमाने की बात है। कॉलेज में शाहरुख हॉकी के बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं।
इस फिल्म को स्वीकारने की मुख्य वजह हॉकी के लिए प्यार ही था। एक बार फिर वे अतीत से जुड़ना चाहते थे। मन में इस बात का भी दु:ख था कि हॉकी को हमारे देश में अब वो प्यार नहीं मिलता जबकि हमारा इस खेल में गौरवशाली इतिहास रहा है।
शाहरुख ने यह फिल्म की और पूरा दिल लगाकर की। शायद उन्हें मन ही मन इस बात का खयाल आया हो कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा नहीं कर पाएगी, लेकिन अपने संतोष के लिए उन्होंने यह फिल्म में काम करना मंजूर किया।
फिल्म जब लगी तो बॉक्स ऑफिस पर ओपनिंग ठंडी रही। लेकिन फिल्म समीक्षकों की समीक्षा ने असर दिखाया। सभी ने तारीफ की। खुद को ट्रेड एनालिस्ट बताने वालों ने फिल्म की बुराई की और कहा कि यह फिल्म नहीं चल पाएगी, लेकिन वे गलत साबित हुए। फिल्म ने दूसरे दिन रफ्तार पकड़ ली और 2007 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में अपना नाम दर्ज करा लिया।
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समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।....
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