बैनर . सारेगामा-एचएमवी निर्माता : मधु मंटेना निर्देशक : अब्बास टायरवाला संगीत : ए.आर. रहमान कलाकार : जॉन अब्राहम, पाखी
क्या हो यदि आपके हाथ एक ऐसी हॉटलाइन लग जाए जो सीधे उस लड़की के दिल तक जाती हो जिसे आप प्यार करते हैं। इससे आप उसके विचारों को जान सकते हैं। दिल की बातें सुन सकते हैं। भले ही इसके लिए थोड़ा-बहुत झूठ बोलना पड़े। पर तब क्या हो जब झूठ इतना बढ़ जाए कि सच्चाई का पता लगने पर लड़की का दिल टूट सकता है। ऐसे में आप आप क्या करेंगे? हॉट लाइन को हैंग अप कर देंगे या प्यार की खातिर झूठ बोलना जारी रखेंगे? कुछ ऐसी ही परिस्थिति से गुजरता है फिल्म का हीरो सिद्धार्थ उर्फ सिड।
एक रात फोन की घंटी से सिड की नींद खुलती है। एक आदमी आत्महत्या करने की धमकी दे रहा है। गलती से लंदन की सुसाइड हेल्पलाइन के फोन सिड को आने लगते हैं और आत्महत्या करने वाले लोग सिड से जीने की वजह पूछते हैं। एक रात मिष्का नाम की लड़की का फोन सिड को आता है और जल्दी ही दोनों में एक-दूसरे के प्रति लगाव पैदा हो जाता है। मिष्का का सिड गुमनाम दोस्त बन जाता है। फिलोसॉफर बन उससे बात करता है। बातों ही बातों में सिड कुछ झूठ बोल जाता है। जैसे वह बहुत साहसी है। जोखिम भरे काम करना उसे बहुत पसंद है। वह बहुत शरारती है। पहाड़ों पर चढ़ना उसे अच्छा लगता है। शॉर्क मछलियाँ उसकी पालतू है।
सिड की मुलाकात मिष्का से होती है और वह उसे चाहने लगता है। सिड समझ जाता है कि उसने सच बोला तो मिष्का को खो बैठेगा। आखिर वह सच बताए तो कैसे, कि वह एक साधारण बुक सेलर है। उसके सिर्फ चार दोस्त हैं। एक छोटे से अपार्टमेंट में रहता है। उसकी एक गर्लफ्रेंड भी है जिसे कोई पसंद नहीं करता। खुद सिड भी। कभी वह पहाड़ पर चढ़ा नहीं। इसके बाद फिल्म में कुछ मजेदार घटनाक्रम घटते हैं, जो गुदगुदाते हैं।
निर्देशक के बारे में : मूलत: अब्बास टायरवाला एक लेखक हैं। कई फिल्मों की कहानी, स्क्रीनप्ले, संवाद और गीत उन्होंने लिखे हैं। 2008 में रिलीज हुई ‘जाने तू... या जाने ना’ के जरिये उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। पहली फिल्म सुपरहिट साबित हुई। ‘झूठा ही सही’ के उन्होंने तीन बार नाम बदले। ‘1-800 लव’ और ‘कॉल मी दिल’ के बाद उन्हें ‘झूठा ही सही’ शीर्षक उपुयक्त लगा। इस फिल्म की नायिका पाखी उनकी पत्नी है।