निर्माता : अंबिका हिंदूजा निर्देशक : लीना यादव संगीतकार : सलीम-सुलेमान कलाकार : अमिताभ बच्चन, सर बेन किंग्सले, आर माधवन, रायमा सेन, श्रद्धा कपूर
‘तीन पत्ती’ को लेकर अमिताभ बच्चन बेहद उत्साहित हैं। उनका मानना है कि फिल्म का विषय अनूठा है। तीन पत्ती ताश का एक खेल है। गणित और ताश के इस खेल के बीच के संबंध को इस फिल्म में दिखाया गया है। अमिताभ बच्चन और बेन किंग्सले जैसे महान अभिनेताओं को इस फिल्म में देखने को मिलेगा। साथ ही शक्ति कपूर की बेटी श्रद्धा कपूर इस फिल्म के जरिये फिल्मों में पदार्पण कर रही हैं।
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वेंकट (अमिताभ बच्चन) एक गणितज्ञ है। उसे अपने विषय में दक्षता हासिल है। रात-दिन वह चिंतन-मनन में खोया रहता है। वह एक नई थ्योरी प्रस्तुत करता है, लेकिन उसके वरिष्ठ प्रोफेसर थ्योरी को नकार देते हैं।
ताश खेलते समय एक दिन वेंकट को लगता है कि ताश के माध्यम से इस थ्योरी को बेहतर तरीके से समझाया जा सकता है और ताश और प्रायिकता के सिद्धांतों के बीच कुछ संबंध है। वह इस बारे में अपने जूनियर प्रोफेसर शांतनु (माधवन) को बताता है। दोनों निर्णय लेते हैं कि जुआघर में जाकर इस थ्योरी को परखना चाहिए। ताश खेल रहे अन्य खिलाडि़यों के पत्तों के बारे में इस थ्योरी से वे जान लेते हैं कि किसके पास कौन-से पत्ते हैं।
लंदन के केसिनो में वेंकट की मुलाकात पर्सी (बेन किंग्सले) से होती है जो दुनिया का सबसे बड़ा जीवित गणितज्ञ है। वेंकट के समीकरणों से पर्सी यह जान लेता है कि प्रायिकता के सिद्धांतों को नए सिरे से लिखना होगा।
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वेंकट की थ्योरी के जहाँ एक और अच्छे परिणाम हैं तो बुरे भी हैं। एक ओर उसकी खोज को उपयोग कई जगह किया जा सकता है तो दूसरी ओर मनुष्य अपने लालच के लिए भी इसका उपयोग कर सकता है।
क्या वेंकट को अपने ज्ञान की कीमत अपनी जान से चुकानी होगी? जानने के लिए देखना होगी तेज गति से भागती हुई थ्रिलर ‘तीन पत्ती’।