दम मारो दम की कहानी का केन्द्र बिंदु है गोआ। दुनियाभर के पर्यटक गोआ की खूबसूरती के कारण यहाँ खींचे चले आते हैं। उन्हें यह जन्नत जैसा लगता है, लेकिन इस सुंदर जगह पर ड्रग्स माफियाओं ने धीमे-धीमे अपने पैर पसार लिए हैं। इनके कसते हुए शिकंजे से कई जिंदगियाँ प्रभावित होती हैं। इन स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफियाओं को खत्म करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है एसीपी विष्णु कामथ (अभिषेक बच्चन) को। विष्णु दिन-रात पूरी ताकत के साथ इस काम में भिड़ा रहता है, लेकिन ये खौफनाक दुनिया उसकी सोच से कही ज्यादा भयानक है।
PR
लॉरी (प्रतीक बब्बर) एक विद्यार्थी है। उसकी गर्लफ्रेंड यूएस पढ़ने के लिए गई है। उसके पीछे-पीछे लॉरी भी वहाँ जाना चाहता है, लेकिन उसकी स्कॉलरशिप को मंजूरी नहीं मिलती है। इसके बाद लॉरी का अपनी जिंदगी पर नियंत्रण नहीं रहता है। उसकी जिंदगी को फिर से सही ट्रेक पर लाने का वादा किया जाता है, लेकिन बदले में उसे अपना जमीर बेचना पड़ेगा। डीजे जोकी (राना दागुबती) एक संगीतकार है और अपने आसपास घट रही सारी घटनाओं से वाकिफ है। ड्रग माफिया से लड़ने का अंजाम ये हुआ कि उसने अपनी सारी प्रिय चीजें खो दी हैं। इतिहास अक्सर अपने आपको दोहराता है। एक बार फिर जोकी और ड्रग माफिया आमने-सामने हैं, लेकिन क्या इस बार वह हिम्मत जुटा पाएगा?
PR
जो (बिपाशा बसु) का सपना एअरहोस्टेस बनने का था, जो पूरा नहीं हो पाया। हिप्पी पीढ़ी की संतान जो लोकल और विदेशी संस्कृति का मिला-जुला रूप है और उसके अंदर कड़वाहट भरी हुई है। बिस्किट (आदित्य पंचोली) एक बिज़नेसमैन है। वैध या अवैध होने वाले हर सौदों में उसका हिस्सा है। गोआ के माफियाओं के बीच की वह एक कड़ी है। कामथ के बढ़ते दबदबे से बिस्किट थोड़ा परेशान है। इन सभी किरदारों की कहानी है ‘दम मारो दम’, जिसमें ड्रामा है, रोमांच है, उतार-चढ़ाव है, सस्पेंस है और चौंका देने वाला अंत है।
PR
निर्देशक के बारे में : रोहन सिप्पी उस खानदान से है जिसने अंदाज, सीता और गीता, शोले, सागर जैसी कई सफल फिल्में दी हैं। पिता रमेश सिप्पी और अमिताभ बच्चन की दोस्ती अगली पीढ़ी में भी जारी है। रोहन और अभिषेक भी बेहतरीन मित्र हैं। रोहन द्वारा निर्देशित हर फिल्म ‘कुछ ना कहो’ (2003), ब्लफमास्टर (2005) और दम मारो दम (2011) में अभिषेक हीरो के रूप में मौजूद हैं। फिलहाल रोहन को अपने पिता रमेश सिप्पी की ऊँचाइयों तक पहुँचने में लंबा सफर तय करना होगा।