निर्माता : विनय पाठक, आज़म खान निर्देशक : शशांत शाह संगीत : कैलाश खेर कलाकार : विनय पाठक, रजत कपूर, नेहा धूपिया, सौरभ शुक्ला, रणवीर शौरी, सुचित्रा पिल्लई, सरिता जोशी
अमर कौल (विनय पाठक) की उम्र होगी 36 वर्ष के आसपास और वह मुंबई नगर का निवासी है। अमर एकांतप्रिय और शर्मीला किस्म का इंसान है और उसमें ऐसी कोई खास बात नहीं है, जो उसे विशिष्ट बनाए। वह एक आम आदमी की भीड़ का हिस्सा है।
अपनी माँ के साथ रहने वाला अमर इस तरह रहता है कि उसके आसपास वाले लोग भी उसके बारे में ज्यादा नहीं जानते। रोजाना सुबह उठकर वह किए जाने वाले कार्यों की सूची बनाता है। उन्हें करता है और सो जाता है। यही उसका रूटीन है। उसे किसी से भी कुछ लेना-देना नहीं है और वह अपने आप में खुश है।
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एक दिन अमर को पता चलता है कि उसकी जिंदगी के सिर्फ तीन माह शेष है। वह अपने अंतिम कामों की एक सूची बनाता है, जिसमें अपने स्कूली दिनों के पुराने मित्रों से मिलना और ढेर सारे पेंडिंग पड़े कामों को निपटाना रहता है।
अमर अपने अंतिम दिनों में उस तरह के काम करता है, जिन्हें लोग चाहकर भी नहीं कर पाते हैं। फिल्म को अरशद सईद ने लिखा है और उन्होंने ट्रेजेडी में कॉमेडी पैदा करने की कोशिश की है।