निर्माता : विशाल भारद्वाज - कुमार मंगत निर्देशक : अनुराग कश्यप गीतकार : गुलजार संगीतकार : विशाल भारद्वाज कलाकार : जॉन अब्राहम, आयशा टाकिया, रणवीर शौरी, परेश रावल, जेसी रंधावा, बिपाशा बसु (विशेष भूमिका), सैफ अली खान (विशेष भूमिका)
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सिगरेट पीना बुरी बात है, फिर भी लोग पीते हैं। इस स्मोकिंग की आदत पर निर्देशक अनुराग कश्यप ने ‘नो स्मोकिंग’ बनाई है। फिल्म में आयशा टाकिया दोहरी भूमिका निभा रही है। बिपाशा ने ‘ओंकारा’ में ‘बीड़ी जलई ले’ पर डांस किया था। इस फिल्म में भी बिपाशा का स्मोकिंग आयटम नंबर है। गाने के बोल है ‘फूँक-फूँक के पी ले’। भारत के साथ इस फिल्म की शूटिंग कज़ाकिस्तान और साइबेरिया में की गई है।
केके (जॉन अब्राहम) को बचपन से ही सिगरेट की लत लग गई थी। जवानी में तो वह पक्का चेन स्मोकर बन गया। केके जिंदगी अपनी शर्तों पर जीता है। केके की धूम्रपान की आदत से उसकी पत्नी अंजली (आयशा टाकिया) बेहद परेशान है। उसने अपने पति की इस आदत को छुड़ाने के लिए सारे जतन कर लिए, लेकिन सब बेकार साबित हुए।
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अंजली एक दिन केके को बाबा बंगाली सिल्दावाले (परेश रावल) के पास ले जाने में कामयाब हो जाती है। बाबा ‘प्रयोगशाला’ नामक नशामुक्ति संस्थान चलाते हैं, जिसमें वे नशे या धूम्रपान से ग्रस्त व्यक्ति का नशा छुड़ा देने का दावा करते हैं।
जब केके बाबा के पास पहुँचता है तो बाबा उससे एक कांट्रेक्ट साइन करवाते हैं, जिसमें लिखा रहता है कि आइंदा वह धूम्रपान नहीं कर सकता। इस अनुबंध को एक बार साइन करने के बाद तोड़ा नहीं जा सकता। केके अनुबंध पर हस्ताक्षर इस सोच के साथ करता है कि उसकी जब मर्जी होगी वह इस अनुबंध को तोड़ देगा।
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कुछ दिनों बाद केके को महसूस होता है कि इस अनुबंध को तोड़ना इतना आसान नहीं है जितना कि वह समझ रहा था। सिगरेट के बिना वह रह नहीं पाता। अनुबंध तोड़कर जब वह पहली बार सिगरेट जलाता है तो उसकी कार में विस्फोट हो जाता है। केके बार-बार सिगरेट न पीने की शर्त को तोड़ने की कोशिश करता है और हर बार उसके साथ अनहोनी घटनाएँ घटित हो जाती है। केके सोचता है कि कहीं न कहीं इन घटनाओं के पीछे उसकी पत्नी अंजली भी जिम्मेदार है।
क्या केके अपनी इस बुरी आदत को छोड़ पाएगा? क्या है बाबा बंगाली की असलियत? इन विचित्र घटनाओं के पीछे किसका हाथ है? जानने के लिए देखिए ‘नो स्मोकिंग’।