बॉस फिल्म की कहानी शुरू होती है बनारस में रहने वाले ईमानदार स्कूल टीचर सत्यकांत शास्त्री के गर्ममिजाज बेटे सूर्या से, जो हरदम किसी ना किसी लड़ाई में पड़ता रहता है। सूर्या के इसी स्वभाव की वजह से सत्यकांत उसे गांव से भगा देता है और अपने छोटे बेटे शिव के साथ रहने लगता है।
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सालों बाद शिव पढ़ाई करने दिल्ली जाता है जहां उसकी मुलाकात अंकिता से होती है। धीरे - धीरे दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ने लगता है लेकिन एसीपी अयुष्मान माथुर इनके प्यार के बीच रोड़ा बन जाता है।
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शिव से जलन रखने वाला आयुष्मान उसे झूठ के जाल में फंसा कर उसका भविष्य बरबाद करने की योजना बनाता है।
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अब सत्यकांत को अपने बेटे शिव को किसी भी कीमत पर बचाना है और तब उसे याद आता है अपना बड़ा बेटा सूर्या।
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15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सूर्या पहले वाला सूर्या नहीं रह जाता। वह अब हरियाणा का डॉन बन चुका है जिसे लोग बॉस बुलाते हैं।
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जब सूर्या के पिता उससे मदद मांगने जाते हैं तो वह सबकुछ भूल कर अपने भाई को बचाने में लग जाता है।
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बॉस अब दिल्ली आता है और भ्रष्ट पुलिस अधिकारी और मंत्री से अपने तरीके से बदला लेकर परिवार को बचाता है।