निर्माता : कुमार मंगत निर्देशक : गणेश आचार्य संगीत : नितिन अरोरा, सोनी चाँदी कलाकार : गोविंदा, सेलिना जेटली, आफताब शिवदासानी, हंसिका, उपेन पटेल, ईशा देओल, मनोज बाजपेयी, अर्चना पूरन सिंह
कोरियोग्राफर के साथ-साथ गणेश आचार्य निर्देशन भी बन गए हैं। उनकी पिछली फिल्म ‘स्वामी’ बॉक्स ऑफिस पर कामयाब नहीं हो पाई थी। इस बार गणेश आचार्य सफलता पाने के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे हैं। व्यावसायिक दृष्टिकोण रखकर उन्होंने ‘मनी है तो हनी है’ नामक फिल्म बनाई है, जिसमें ढेर सारे कलाकार हैं।
फिल्म में 6 अहम किरदार हैं और कहानी इनके इर्दगिर्द घूमती है। बॉबी खुशमिजाज किस्म का इंसान है। वह अपने आपको साबित करना चाहता है, इसलिए घर से भाग खड़ा हुआ।
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लालाभाई को एक करोड़ रुपए की लॉटरी खुल गई और उनकी गिनती धनवानों में होने लगी। जल्दी ही वे सड़क पर आ गए क्योंकि जो व्यवसाय उन्होंने शुरू किया था, उसमें उन्हें नुकसान हो गया।
गौरव एक कॉपी राइटर है, लेकिन उसे नौकरी से निकाल दिया गया है। माणिक एक संघर्षरत मॉडल है, जो एक उम्रदराज महिला फैशन डिजाइनर के साथ इसलिए संबंध बनाए हुए है ताकि उसे आगे बढ़ने का अवसर मिले।
आशिमा कपूर टीवी की जानी-मानी अभिनेत्री हैं, लेकिन खुश नहीं है। वे फिल्मों में नायिका की भूमिका निभाना चाहती हैं। श्रुति एक ड्रेस डिजाइनर है, जो फिलहाल संघर्ष कर रही हैं।
इनकी जिंदगी में मोड़ तब आता है जब सभी को एक एसएमएस मिलता है। इसमें बताया जाता है कि वे एक हजार करोड़ रुपए की कंपनी के मालिक है। सभी की खुशी का ठिकाना नहीं रहता।
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यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिकती क्योंकि कंपनी का वकील राज खोलता है कि कंपनी को 1200 करोड़ रुपए की उधारी चुकाना है। सब को यह पैसा भरना है और जब तक यह पैसा नहीं चुकाया जाता तब तक उन्हें एक घर में कैद रहना होगा।
आगे क्या होगा? जानने के लिए देखिए ‘मनी है तो हनी है’।