आदित्य (समीर दत्तानी) एक मध्यमवर्गीय परिवार से है और ‘ईज़ी फाइनेंस’ में काम करता है। आदित्य की जिंदगी उसके दोस्त विक्की और भ्रष्ट बॉस के इर्दगिर्द घूमती है। आदित्य गलती से सोनिया (नौहीद) से टकरा जाता है, जो उसे मनचला लड़का समझ लेती है।
विक्की की सलाह से आदित्य कई बार सोनिया की यह गलतफहमी दूर करने की कोशिश करता है, लेकिन हर बार बात और बिगड़ जाती है। लेकिन धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे को दिल दे बैठते हैं और शादी कर लेते हैं। कहानी यहाँ खत्म नहीं होती कि ‘उसके बाद वे सुखी जीवन बिताने लगे’, बल्कि इसमें तड़का तो इसके बाद लगता है।
सोनिया को पाने के लिए आदित्य उसके पिता से झूठ बोलता है कि वह कंपनी में ऊँचे पद पर काम करता है और उसका शानदार घर है। जबकि सोनिया को शादी के बाद वह चॉल में रखता है।
नया घर खरीदने के लिए आदित्य पैसे जमा करता है, लेकिन उस पर तब मुसीबत आ जाती है जब सोनिया के पिता आदित्य के घर आना चाहते हैं। इससे बचने के लिए कुछ दिनों के लिए वह उन्हें विक्की के घर ठहरा देता है। आखिरकार किसी तरह वह अपना नया घर खरीद लेता है और उसे लगता है कि सारी मुसीबतें खत्म हो गई हैं। लेकिन नई मुसीबतें उसका इंतजार कर रही थीं।
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जिस सोसायटी में वह घर लेता है वहाँ सिर्फ शाकाहारी लोग ही घर ले सकते हैं। सोनिया के पिता माँसाहारी हैं और उन्हें रोजाना भोजन में मनपसंद माँसाहारी व्यंजन चाहिए। आदित्य और सोनिया उन्हें यह नहीं बताते कि सोसायटी में माँसाहारी खाने पर पाबंदी है।
असली मजा तब शुरू होता है जब आदित्य और सोनिया अपने पिता के लिए प्रतिबंधित खाना बनाते हैं। सोसायटी के अन्य सदस्यों और पिता के बीच संतुलन बनाने में कई हास्यास्पद परिस्थितियाँ निर्मित होती हैं।