निर्माता : रवि चोपड़ा और डेविड हेमिल्टन निर्देशक : दीपा मेहता संगीतकार : मायचल डन्ना कलाकार : प्रीति जिंटा, वंश भारद्वाज, गीतिका शर्मा
पंजाब में रहने वाली चाँद (प्रीति जिंटा) के माता-पिता उसकी शादी कनाडा में रह रहे रॉकी (वंश भारद्वाज) से तय करते हैं, जिससे वह कभी मिली ही नहीं। रॉकी शादी करने के लिए अपने परिवार के साथ पंजाब आता है और शादी करके चाँद के साथ कनाडा लौट जाता है।
रॉकी अपने परिवार के सदस्यों के साथ तनाव में जी रहा है। उसे अपनी माँ और कन्फ्यूज पिता की चिंता है। अपनी बहन, उसके पति तथा उनके दो बच्चों की भी उसे मदद करना है।
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ये सभी लोग शहर के एक छोटे से घर में रहते हैं। स्थिति को और बिगाड़ने के लिए रॉकी खुद ही जिम्मेदार है क्योंकि वह सारा पैसा अपने परिवार को कनाडा में बसाने में खर्च करता है, जबकि वह एक टैक्सी ड्राइवर ही तो है।
पढी-लिखी खूबसूरत चाँद को बहुत जल्द अहसास हो जाता है कि वह एक ऐसे संसार में फँस गई है जिससे उसका वास्ता नहीं है। वहाँ पर उसका अपना कहने वाला कोई नहीं है। उसे तो अपने ससुराल वालों से सिर्फ यातनाएँ ही मिलती हैं। ऐसे में उसे भारत में रह रहे अपने परिवार वालों की याद आती है, लेकिन वह उनसे मिलने नहीं जा सकती।
चाँद को धीरे-धीरे अहसास होता है कि परिवार के सदस्य उसे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए दासी बनाकर रखना चाहते हैं और उसका पति जीवन की मुसीबतों तले दबकर चाँद पर ही हाथ उठाता रहता है। इन सबसे बचने के लिए चाँद एक फैक्ट्री में काम शुरू कर देती है।
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फैक्ट्री में होटल के तौलिये धोते समय उसकी मुलाकात रोजा से होती है। रोजा उसके चेहरे पर मेकअप से छिपाए हुए दाग से समझ लेती है। तब रोजा, चाँद को अपने प्यार को पाने के लिए एक जादुई रास्ता दिखाती है। चाँद दूसरे रास्ते पर चलने की कोशिश करती है, लेकिन उसे उसका परिणाम सही नहीं लगता।
परिवार की तरफ से किसी भी तरह की मदद न मिलने पर हर तरफ से निराश होकर चाँद अपने जीवन को एक अलग रूप में देखने की कल्पना शुरू करती है जो कि किंग कोबरा की कहानी से मेल खाती है।