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जब चारो और ध्वनि प्रदूषण फैला हुआ हो, शोर बहरा कर रहा हो, तो कोई अपनी अंतरात्मा की आवाज कैसे सुन सकता है? इसी तथ्य को ‘शोर इन द सिटी’ नामक फिल्म में रेखांकित किया गया है। फिल्म में तीन कहानियाँ हैं जो कही न कही आपस में जुड़ी हुई है। मुंबई में गणपति उत्सव के दौरान होने वाला शोर इन कहानियों की पृष्ठभूमि में है।
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एनआरआई अभय (सेंधिल राममूर्ति) मुंबई आ गया है और उसने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि यह शहर उसका स्वागत करने के लिए तैयार नहीं है जबकि उसने इसे अपना घर समझा था। खूबसूरत शर्मिली (प्रीति देसाई) की शरण में वह है।
तिलक (तुषार कपूर) एक ईमानदार इंसान है। अपने दोस्तों के कारण न चाहते हुए भी वह लोकल ट्रेन में हुई एक लूट का हिस्सा बन जाता है। इसके बाद उसकी जिंदगी खतरनाक रास्ते पर चलनी लगती है और वह गहरे दलदल में धँसता जाता है, जबकि उस पर सपना (राधिका आप्टे) की जवाबदारी भी है।
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युवा सावन (संदीप किशन) का जिंदगी में एक ही मकसद है। मेहनत कर मुंबई जूनियर क्रिकेट टीम में शामिल होना। लेकिन भ्रष्टाचार के कारण यह संभव नहीं है। उसे कीमत अदा करनी होगी। अब सावन का पहला काम है किसी तरह पैसों का इंतजाम करना। सभी किरदार बाहर के और अंदर के शोर से घिरे हुए हैं, एक ऐसे शहर में जहाँ उसी के कानून-कायदे चलते हैं।