निर्माता : सुधीर मिश्रा, बिग पिक्चर्स निर्देशक : पीयूष झा संगीत : शंकर-अहसान-लॉय, जस्टिन, उदय, संदेश शांडिल्य कलाकार : परज़ाद दस्तूर, आयशा कपूर, संजय सूरी, आर. माधवन, अरुणोदय सिंह
14 वर्षीय सिकंदर रज़ा (परज़ान दस्तूर) के माता-पिता की दस वर्ष पहले हत्या कर दी गई थी। तब से वह अपने चाचा और चाची के साथ कश्मीर के एक छोटे-से गाँव में रहता है। सिकंदर की सारी खुशियाँ उसके स्वर्गवासी माता-पिता और फुटबॉल तक सीमित हैं।
14 वर्षीय नसरीन (आयशा कपूर) सिकंदर की दोस्त है। एक दिन स्कूल से लौटते समय रास्ते में सिकंदर को एक बंदूक मिलती है, जिसे नसरीन के मना करने के बावजूद वह उठा लेता है।
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नसरीन उसे कई बार समझाती है, लेकिन सिकंदर उसकी बात नहीं मानता। यहीं से सिकंदर का सामना जिंदगी के अँधेरे पक्ष से होता है। बंदूक के कारण हालात उसके काबू में नहीं रहते और कई लोगों की जानें जाती हैं।
पहले तो सारे गुनाह सिकंदर के लगते हैं, लेकिन जब मामले की तह तक पहुँचा जाता है तो पता चलता है कि सिकंदर तो सिर्फ मोहरा है। यह खेल सिकंदर के सहारे वे लोग खेल रहे हैं, जो कश्मीर में शांति नहीं चाहते हैं।