ठगी और बेईमानी कर अपनी आजीविका चलाने वाला समीर खन्ना (मशहूर अमरोही) सिंगापुर जाकर नाइट क्लब चलाने वाले गैरी रोज़ारियो (जैकी श्रॉफ) का ‘रिकवरी एजेण्ट’ बन जाता है। गैरी भी एक अपराधी है।
समीर के भाई को आर्थिक मदद की जरूरत आन पड़ती है। वह अपने भाई की मदद के लिए अपने बॉस गैरी से रुपए माँगता है, लेकिन गैरी सहायता करने से इनकार कर देता है।
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कम समय में ज्यादा रुपए कमाने के लिए समीर के दिमाग में सुपर स्टार अभिनेता ज्ञानेश्वर सिंह (शहज़ाद खान) की बेटी ईशा के अपहरण करने का विचार आता है। ज्ञानेश्वर सिंह के पास करोड़ों रुपए की संपत्ति है।
ईशा (विशाखा सिंह) को समीर अपने प्यार के जाल में फँसाकर सेंटोसा आयलैण्ड ले जाता है। वहाँ से वह ज्ञानेश्वर सिंह से उसकी बेटी को रिहा करने के बदले में रुपयों की माँग करता है।
ज्ञानेश्वर का गैरी जिगरी दोस्त है। वह गैरी से मदद माँगता है। ज्ञानेश्वर को गैरी आश्वासन देता है कि वह उसकी बेटी को रिहा कर वापस लाएगा। ईशा को छुड़वाने का जिम्मा गैरी अपने खास आदमी को सौंपता है। वो कोई और नहीं बल्कि समीर ही रहता है।
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समीर की मुश्किल तब और बढ़ जाती है जब एक ‘ड्रग डील’ के दौरान डाबर (मुकेश ऋषि) और प्राण (किरण कुमार) ईशा को अपने साथ ले जाते हैं। वे ईशा की जान के बदले में समीर से अनुचित माँग करते हैं।
समीर इन परेशानियों से कैसे निकलता है, यह फिल्म में रोचक अंदाज में दिखाया गया है।