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DOM Review: ड्रग्स, सेक्स और गन्स का कॉकटेल

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समय ताम्रकर

शनिवार, 12 जून 2021 (10:29 IST)
DOM Review: ब्राजील उन देशों में शामिल है जिसे ड्रग ने खोखला कर ‍दिया है। युवा पीढ़ी इस बुरी आदत की चपेट में आ गई क्योंकि वहां ड्रग इतनी आसानी से उपलब्ध है जैसे हमारे यहां चाय और सिगरेट। भ्रष्टाचार ने भी ‘नशे’ को फलने-फूलने का भरपूर अवसर दिया। इसी बात को मद्देनजर रखते हुए ‘डोम’ वेबसीरिज का निर्माण किया गया है। यह सीरिज लगभग 35 साल का समय समेटती है। 1970 के समय में किस तरह ब्राजील में ड्रग ने एंट्री ली? किस तरह से इसका नेटवर्क बना? कैसे इसने बच्चों से लेकर तो बूढ़ों को चपेट में लिया? युवाओं पर किस तरह इसका दुष्प्रभाव पड़ा? इन बातों को सीरिज में दर्शाया गया है। विसेंट कुब्रुस्ली और ब्रेनो सिलवीरा ने इस सीरिज को ‍निर्देशित किया है और लेखन टीम को भी लीड किया है। इस सीरिज को मनोरंजक बनाने के लिए ड्रग्स, सेक्स, क्राइम और गन्स का सहारा लिया गया है। इन बातों के इर्द‍गिर्द जोरदार ड्रामा रचा गया है जो कॉकटेल जैसा नशा देता है।

विक्टर दांतास एक पुलिसवाला है जो अधेड उम्र का है। वह अपने जवानी के दिनों से ही ड्रग्स और उसका धंधा करने वालों के ‍खिलाफ लड़ता आया है। उसका युवा बेटा पेड्रो टीनएज से ही ड्रग्स लेने लगता है। उसे दसियों बार रिहैब सेंटर पहुंचाया जाता है, लेकिन वह सुधरने का नाम नहीं लेता। ड्रग्स के नशे में चूर होकर वह अपराध के दलदल में फंस जाता है। अपने ‘प्लेबॉय’ लुक के जरिये वह अपने साथियों के साथ अमीरों के घर चोरियां करता है और खूब पैसा बनाता है।

कहानी को बार-बार आगे-पीछे घुमाया गया है। अधेड़ विक्टर की युवा अवस्था की कहानी भी दिखाई गई है कि किस तरह से डाइवर होकर उसने पुलिस के लिए काम किया और वर्तमान में वह अपने बेटे को ड्रग्स के चंगुल से छुड़वाने की कोशिश कर रहा है। पेड्रो की भी दो कहानियां चलती हैं, एक जब वह बच्चा था और दूसरी उसके वर्तमान दौर की। कहानी का आगे-पीछे होना इसलिए नहीं अखरता कि इन्हें बहुत ही अच्छी तरह से पिरोया गया है। एक ही किरदार की दो-दो कहानियां साथ में चलती है और हर ट्रैक का अपना मजा है।

70 के दशक का ब्राजील, उस समय ड्रग का पैर पसारना, आसानी से हर जगह ड्रग का ‍मिलना और युवा विक्टर का ड्रग माफियाओं से मुकाबला करना बेहद दिलचस्प है। अधेड़ विक्टर अपने नशेड़ी बेटे और छोड़ी गई पत्नी से जूझ रहा है। दूसरी ओर पेड्रो का प्लेबॉय शैली में जीवन जीना, खूबसूरत लड़कियों का साथ, चोरी करना, परिवार के बजाय दोस्तों को ज्यादा भाव देना एक थ्रिल पैदा करता है। ये लेखक और ‍निर्देशक का कमाल है कि उन्होंने अपनी बात इतनी सफाई से कही है ‍कि कहीं भी कोई कन्फ्यूजन पैदा नहीं होता। हर ट्रैक बड़े ही स्मूथ तरीके से चलता है।

शुरुआती 4 एपिसोड गजब के हैं। इनमें जबरदस्त थ्रिल है। ब्राजील को देखना सुखद लगता है। रहस्य और रोमांच का जबरदस्त डोज है। ड्रग्स का आसानी से उपलब्ध होना और इसके लिए युवाओं के तेवर घर वालों के प्रति बगावती होना हैरान करता है। पेड्रो और उसके दोस्तों के लिए ड्रग सनसनी की तरह है। उसके बिना उन्हें जिंदगी नीरस लगती है, यह बात परेशान करती है। पुलिस वाला और उसका अपराधी बेटे का टकराव ड्रामे को दिलचस्प बनाता है। स्क्रिप्ट में इतने रोचक उतार-चढ़ाव दिए गए हैं ‍कि दिलचस्पी बढ़ती जाती है। 4 एपिसोड के बाद कहानी में ठहराव आता है, लेकिन तब तक आप किरदारों और कहानी में इतना डूब चुके होते हैं ‍कि आगे क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है।

विसेंट कुब्रुस्ली और ब्रेनो सिलवीरा का निर्देशन जबरदस्त है। उन्होंने दृश्यों को कमाल का शूट किया है। पूरी सीरिज पर उनकी पकड़ नजर आती है। कलाकारों से बेहतरीन अभिनय उन्होंने लिया है। ड्रग्स को इस तरह दिखाया गया है कि सीरिज देखते हुए ही आप पर सुरुर चढ़ने लगता है। कलाकारों का चयन इतना उम्दा है कि हर कलाकार अपने रोल में फिट नजर आता है। कहने वाले कह सकते हैं कि ‘डोम’ में अपराध को ग्लैमराइज किया गया है, लेकिन जिस तरह के किरदार हैं उनकी कहानी को इसी तरह से पेश किया जा सकता है। सीरिज में बोल्ड दृश्यों की भरमार है।

सीरिज का संपादन अद्‍भुत है। कहना होगा कि एडिटर ने निर्देशक और एक्टर्स के काम को बेहद आसान किया है और साबित किया है कि फिल्म/सीरिज एडिटिंग टेबल पर बनती है। कहानी को जिस तरीके से पेश किया गया है उसमें गड़बड़ी होने की पूरी गुंजाइश थी, लेकिन एडिटर ने जरा सी भी चूक नहीं होने दी। यह सीरिज सिर्फ एडिटिंग के लिए भी देखी जा सकती है।

उम्रदराज विक्टर के रूप में फ्लेवियो तोलेज़ानी का अभिनय कमाल का है। एक ऐसे पिता का रोल, तो तमाम परेशानियों के बावजूद कभी भी हार नहीं मानता, को फ्लेवियो ने शानदार तरीके से जिया है। पेड्रो के किरदार को गेब्रियल लियोन ने साकार किया है। वे बेहद हैंडसम लगे हैं और उन्होंने अपनी इस खासियत का सीरिज में भरपूर उपयोग किया है। उनका व्यक्तित्व कहानी को विश्वसनीय बनाने में मदद करता है। गुस्सैल और प्लेबॉयनुमा रोल में वे परफेक्ट लगे हैं। फिलिप ब्रैगांका ने युवा विक्टर का रोल निभाया है जो डाइवर रहता है। फिलिप भी बेहद हैंडसम लगे हैं और उनकी मासूम चेहरे का निर्देशकों ने शानदार उपयोग किया है। फिलिफ की एक्टिंग शानदार रही है।

रक़ील विलर और इसाबेला सैंटोनी ने सीरिज के ग्लैमर को बढ़ाया है। न केवल वे खूबसूरत लगी हैं बल्कि कैमरे के सामने वे बिंदास भी रही हैं। इमोशनल दृश्यों में रकील विलर अपनी छाप छोड़ने में सफल रही हैं। फैबियो लागो, जो कि ड्रग डीलर के रूप में नजर आए हैं, का अभिनय जबरदस्त है। घुंघराले बाल और उनकी बोलती आंखें किरदार को धार देती है। अन्य कलाकारों का काम भी शानदार है।

‘डोम’ ड्रग्स, सेक्स और गन्स का यह जबरदस्त कॉकटेल है। आठ एपिसोड वाली इस सीरिज का पहला सीजन जबरदस्त है। दूसरे सीजन का इंतजार रहेगा।

निर्देशक : विसेंट कुब्रुस्ली, ब्रेनो सिलवीरा
कलाकार: गेब्रियल लियोन, फ्लेवियो तोलेज़ानी, फिलिप ब्रैगांका, रक़ील विलर, इसाबेला सैंटोनी, रेमन फ्रांसिस्को, डिगाओ रिबेरो, फैबियो लागो
अमेजन प्राइम पर उपलब्ध * हिंदी में डब
सीजन : 1 * एपिसोड : 8
केवल वयस्कों के लिए
रेटिंग : 4/5

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