Publish Date: Sun, 24 Feb 2008 (21:08 IST)
Updated Date: Sun, 24 Feb 2008 (21:07 IST)
वित्तमंत्री पी. चिदंबरम अपना सातवाँ बजट शुक्रवार को संसद में पेश करेंगे। अगले आम चुनावों से पहले यह अंतिम पूर्ण बजट होगा और इसमें व्यक्तिगत एवं निगमित कर में कटौती उत्पाद शुल्क में राहत तथा करों के सरलीकरण की उम्मीद है।
अपने बजट को 'आम आदमी का बजट' बनाने के लिए चिदंबरम को सभी हितों को साधने में खासी मशक्कत करनी पडे़गी।
वित्त वर्ष 2008-09 के केंद्रीय बजट में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एनआरईजी) सर्व शिक्षा अभियान, ग्रामीण स्वास्थ्य एवं बिजली क्षेत्रों के लिए व्यापक धनराशि के प्रावधान की घोषणा किए जाने की संभावना है।
इसके अलावा विशेषकर अगले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उच्च विकास दर का लाभ सभी तक पहुँचाने की कोशिश के तहत किसानों के लिए ऋण राहत पैकेज की घोषणा भी की जा सकती है।
भारतीय मध्यम वर्ग तथा उद्योग जगत 1997-98 के ड्रीम बजट को अब भी भूला नहीं है। उसे भी चिदंबरम ने अनेक तरह की अपेक्षाएँ हैं जिनमें आयकर एवं उत्पाद शुल्क में छूट तथा अन्य करों का सरलीकरण शामिल है। सरकारी कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग के कार्यान्वयन की घोषणा की उम्मीद है।
सूत्रों ने बताया कि वित्तमंत्री द्वारा अपने बजट में किसी तरह के नए कर लगाने की संभावना नहीं है। हालाँकि बैंकिंग नकदी सौदा कर (बीसीटीटी) जैसे विवादित करों की समीक्षा की जा सकती हैं। सरकार के राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी को ध्यान में रखा जाए तो वे हर लोकसभा क्षेत्र के लिए पैकेज की दिशा में काम कर सकते हैं।
वित्तीय एवं राजस्व घाटे के लक्ष्य को प्राप्त करने के साथ साथ बजट में नौ प्रतिशत जीडीपी विकास दर को निरंतर बनाए रखने तथा कीमतों के लिहाज से संवेदनशील मुद्रास्फीति दर को चार प्रतिशत के आसपास टिकाए रखने पर भी बजट में ध्यान दिए जाने की संभावना है।
कृषि क्षेत्र में गिरावट से चिंतित चिदंबरम सिंचाई एवं कृषि उत्पादन क्षेत्र के लिये पैकेज की घोषणा कर सकते हैं।
About Writer
भाषा
भाषा हिन्दी समाचार एजेंसी है, जो कि वेबदुनिया को अनुबंध के तहत देश-विदेश की खबरें उपलब्ध करवाती है।....
और पढ़ें