Publish Date: Tue, 26 Feb 2013 (20:08 IST)Updated Date: Tue, 26 Feb 2013 (20:08 IST)
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नई दिल्ली। अर्थशास्त्रियों का मत है कि रेलवे द्वारा खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरक जैसी सभी प्रमुख वस्तुओं के माल ढुलाई भाड़े में वृद्धि से मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ेगा।
आरपीजी फाउंडेशन के मुख्य अर्थशास्त्री पई पानांदीकर ने कहा कि निश्चित तौर पर इससे परिवहन लागत बढ़ेगी। कोयला और सीमेंट जैसे भारी उद्योगों के लिए परिवहन लागत कम से कम आधा प्रतिशत बढ़ेगी। इसके अलावा, मुद्रास्फीति में भी 0.25 प्रतिशत की तेजी आएगी।
उल्लेखनीय है कि जनवरी में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति घटकर 6.62 प्रतिशत पर आ गई, जबकि इस दौरान खुदरा मुद्रास्फीति दहाई अंक (10.79) प्रतिशत पर बनी रही।
माल ढुलाई भाड़े में वृद्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए एसबीआई की मुख्य अर्थशास्त्री बृंदा जागीरदार ने कहा कि बढ़ते राजकोषीय घाटे को देखते हुए यह बढ़ोतरी अपरिहार्य थी। हालांकि, इससे मुद्रास्फीति ऊंची बनी रहेगी।
जागीरदार ने कहा कि हमें मुद्रास्फीति से परे देखना होगा। बढ़ते राजकोषीय घाटे के चलते अर्थव्यवस्था दबाव में है। आर्थिक वृद्धि ज्यादा महत्वपूर्ण है। मैं इस बात से सहमत हूं कि यह एक सख्त कदम है, लेकिन इससे सुविधाएं बढ़ेंगी और सुरक्षा में सुधार होगा।
रेलमंत्री पवन कुमार बंसल ने 2013-14 के लिए रेल बजट में खाद्यान्न और दालों, पिग आयरन, हाई स्पीड डीजल, मूंगफली तेल, केरोसिन और एलपीजी जैसी चीजों पर मूल ढुलाई भाड़े में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि का प्रस्ताव किया है।
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी ने कहा कि इससे मुद्रास्फीति बढ़ेगी, लेकिन इसका बहुत व्यापक असर नहीं होगा क्योंकि मांग पहले से कमजोर बनी हुई है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की अर्थशास्त्री अनुभूति सहाय ने कहा कि मुद्रास्फीति इस बात पर भी निर्भर करेगी कि इस वृद्धि का कितना बोझ ग्राहकों पर डाला जाता है। (भाषा)