Publish Date: Wed, 01 Feb 2017 (12:57 IST)
Updated Date: Thu, 02 Feb 2017 (11:49 IST)
नई दिल्ली। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश करते हुए मध्यम वर्ग के आयकर दाताओं को बड़ी राहत देने की घोषणा की। उन्होंने बजट में कहा कि अब 2.5 से 5 लाख तक की आय वालों को आधा ही टैक्स देना होगा। इस स्लैब में टैक्स की दर को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज संसद में वित्त वर्ष 2017-18 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि नोटबंदी के बाद वेतनभोगियों को उम्मीद थी कि उन पर आयकर का बोझ कम होगा। सरकार ने उनकी उम्मीद पूरी करते हु्ए ढाई लाख से पांच लाख रुपए के स्लैब में आयकर की दर 10 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया है। 5 लाख से ज्यादा की आय पर 12500 रुपए का फायदा होगा।
जेटली ने कहा कि इससे सरकार को 15,500 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। इसकी आंशिक क्षतिपूर्ति के लिए 50 लाख रुपए से एक करोड़ रुपए तक की आय वालों के लिए आयकर पर 10 प्रतिशत अधिभार लगाने का प्रस्ताव है।
जेटली ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब 3 लाख रुपए तक की आय वालों को टैक्स नहीं चुकाना होगा। जबकि 3 से 3.5 लाख वालों को 2500 रुपए टैक्स लगेगा।
जेटली ने कहा कि देश में 3.7 करोड़ लोग आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं। इनमें 99 लाख लोग अपनी आमदनी ढाई लाख रुपए से कम दिखाते हैं यानी वे आयकर के दायरे से बाहर हैं। डेढ़ करोड़ लोग अपनी आमदनी ढाई लाख रुपए से पांच लाख रुपए के बीच, 52 लाख लोग पांच लाख रुपए से 10 लाख रुपए के बीच तथा सिर्फ 25 लाख अपनी आमदनी 10 लाख रुपए से अधिक दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि स्पष्ट रूप से कर चोरी की जा रही है जिससे ईमानदार करदाताओं पर कर का बोझ ज्यादा पड़ता है। पचास लाख रुपए से अधिक की आमदनी दिखाने वालों की संख्या सिर्फ 1.72 लाख है जबकि कारों की बिक्री तथा विदेश यात्रा के आंकड़े काफी ज्यादा हैं।
जेटली ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में अप्रैल से दिसंबर के बीच प्रत्यक्ष कर संग्रह 34.8 प्रतिशत बढ़ा है जो आज से पहले कभी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि इसमें नोटबंदी का भी काफी योगदान है क्योंकि लोगों ने बड़ी मात्रा में अग्रिम कर जमा कराए हैं।
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Publish Date: Wed, 01 Feb 2017 (12:57 IST)
Updated Date: Thu, 02 Feb 2017 (11:49 IST)