उन्नीस वर्षीय कशिश खुश भी है और घबराई हुई भी। खुश इसलिए कि आखिरकार उसे प्रोफेशनल डिग्री लेने के लिए पुणे जाने की अनुमति पापा-मम्मी से मिल गई है। वो बहुत खुश है क्योंकि ये उसका सपना है, वो अपनी दक्षता, अपनी क्रिएटिविटी दुनिया को बता देना चाहती है। वहीं मन ही मन नई जगह और नए लोगों के बीच कैसे रहेगी, इसकी घबराहट भी उसे है। घर के सभी लोग उसे ढेरों हिदायतें देने में लगे हैं।
कभी-कभी उसे चिढ़ भी होने लगती है। कुछ इसी तरह का हाल खुशबू का भी है। कैम्पस सिलेक्शन में उसे मुंबई का ऑफर मिला है। शानदार पैकेज और मल्टीनेशनल कंपनी के इस ऑफर ने उसे सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। बस मुंबई की फास्ट लाइफ से सामंजस्य कैसे बैठाएगी, यह चिंता उसे है। फिर आज तक वो कभी घर से दूर नहीं रही है। कभी बाहर जाना भी हुआ तो मम्मी-पापा और पूरे परिवार के साथ। इसलिए थोड़ी-सी नर्वस है।
कशिश और खुशबू की तरह अब कई युवतियाँ अपने सपनों की उड़ान भरते के लिए पंख फैला रही हैं। देश क्या, वे विदेशों तक कामयाबी के सफर तय कर रही हैं। ऐसे में उनके लिए फिक्र करने वाले माता-पिता तथा परिजन और स्वयं वे एक अनजानी घबराहट से व्याकुल रहते हैं।
अब तक सुरक्षा तथा ढेर सारी सुविधाओं तथा परिवार के साथ रही बिटिया नई और अनजानी जगह पर कैसे रहेगी? खाना कहाँ खाएगी? आदि जैसी कई चिंताएँ होती हैं। बेहतर है कि इन चिंताओं को परे हटाकर बिटिया को उसकी सुरक्षा और सुविधा से जुड़ी कुछ बातें बताई जाएँ ताकि वह आत्मविश्वास के साथ अपना लक्ष्य हासिल कर सके और आप भी रहें निश्चिंत।
अनजान जगह से पहचान का मौसम
लॉजिंग - बोर्डिंग : यथासंभव सिंगल रूम की व्यवस्था देखें। इससे स्वयं के सोने, उठने-बैठने, पढ़ने का समय तय करना अपनी मर्जी पर होता है। प्रायवेसी बनी रहती है। आपको कमरा साफ-सुथरा रखने की आदत भी अवश्य बनानी चाहिए ताकि उस जगह रहकर हमेशा तरोताजा महसूस कर सकें।
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फ्रेंडशिप : लंबे-चौड़े दायरे से परहेज करें। लक्ष्य प्राप्ति हेतु समान विषय, समान विचार और आशावादी दृष्टिकोण वालों से मित्रता रखना बेहतर होगा। अति आत्मविश्वासी या सदा नकारात्मक चिंतन करते रहने वाले लोगों से दूरी अवश्य बनाएँ।
फोन/मोबाइल : यह आधुनिक समय का सबसे बड़ा वरदान है। इसके माध्यम से आप हमेशा अपने लोगों के संपर्क में रह सकते हैं और आपको रहना ही चाहिए। फोन के रूप में अपनों की उपस्थिति आपको अकेलेपन से भी बचाएगी एवं विपरीत परिस्थितियों में आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए अनुभवी मार्गदर्शन भी आपको मिलेगा। यदि आपकी और परिजनों की मोबाइल सिम एक समान कंपनी की हो तो और भी अच्छा।
जहाँ आप रह रही हैं वहाँ के मकान मालिक व अन्य परिचितों के नंबर परिजनों को देकर रखें। आपसे संपर्क न हो पाने की स्थिति में वे उनसे आपके विषय में जानकारी ले सकते हैं।
खाना-पीना : आजकल हर तरह की सुविधा उपलब्ध है, ग्रुप मेस हो या टिफिन सेंटर। इस व्यवस्था में आपको समझौतावादी भी होना पड़ेगा। क्योंकि यहाँ जो उपलब्ध होता है वही खाना होता है। यदि मामूली शिकायतें हों तो उनसे तालमेल बैठाने की कोशिश करें। यदि आप कुछ बनाना जानती हों तो इस हेतु कामचलाऊ व्यवस्था भी करके रखें। इससे आपका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। पानी की सुरक्षित व्यवस्था अनिवार्य है।
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इकोनॉमी : आजकल इंटरनेट बैंकिंग के चलते पालकों व बच्चों के हित में बड़ा चमत्कारी परिवर्तन हो गया है। किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में अपना खाता खोलें और एटीएम की पात्रता आने पर उसे भी प्रयोग में लाएँ।
पैरेंट्स आपकी आवश्यकतानुसार प्रतिमाह खाते में जो रकम जमा करते हैं उसका पूरा हिसाब आप भी एक डायरी में प्रतिदिन नोट अवश्य करें। उन्हें भी पता चलेगा कि आप कितना उचित-अनुचित खर्च करते हैं। इससे अप्रत्यक्ष रूप से मितव्ययिता की शिक्षा भी मिलेगी।
व्हीकल : स्कूल-कॉलेज, कोचिंग क्लास व आवास की व्यवस्था बड़े शहरों में अक्सर दूर-दूर ही मिलती है। अतः कोई भी सुविधा लेने के पहले साइकल का विचार सबसे पहले करें। यह आपके स्वास्थ्य व भविष्य के लिए सबसे उत्तम रहेगा। पढ़ाई के लिए लंबी-लंबी सीटिंग देने के बाद साइकल द्वारा आवागमन से हल्की-फुल्की कसरत भी होगी।
यह शारीरिक व मानसिक दोनों के लिए लाभदायक होगी। यदि अपरिहार्य हो तो बिना गियर का कोई वाहन लें। लेकिन उसे संयम के साथ चलाएँ।
लक्ष्यों की प्राप्ति करना बेशक एक श्रमसाध्य काम है, किंतु अपने स्तर पर उपरोक्त सावधानियाँ रखकर हम थोड़ा सुविधाजनक तरीके से इसे कर सकते हैं। यही अनुशासन यदि हमने अपने जीवन में उतार लिया तो हमेशा विकास के रास्ते पर हम आगे बढ़ते जाएँगे।