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ब्‍लॉगिंग का नया टशन

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कैम्पस बज
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इंटरनेट की वजह से आज युवा पहले से कहीं ज्‍यादा आजाद है। फि‍र वो चाहे ऑनलाइन नौकरी ढूँढना हो या ऑनलाइन एक्‍जाम देना हो। दोस्‍तों से गपशप करनी हो या अपने वि‍चारों को अभि‍व्‍यक्त करना हो। अब युवा ब्लॉग के जरिए अपने को अभिव्यक्त कर रहे हैं। तमाम मुद्दों पर लिख रहे हैं। इसी बहाने वे एक-दूसरे के विचार जानते हैं और एक ही सोच के युवा भी आपस में जुड़ते हैं ताकि कुछ सार्थक कार्य भी कर सकें। ब्लॉग के प्रति बढ़ते क्रेज पर पेश है एक रिपोर्ट-

अमिताभ-आमिर-शाहरुख से प्रभावित होकर कई युवा ब्लॉगिंग कर रहे हैं। ये सिलसिला अब आम आदमियों की फेहरिस्त में भी प्रमुखता से शामिल हो गया है। गौरतलब है कि इनमें विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है, जो ब्लॉग्स द्वारा अपने विचारों से अपने दोस्तों, मित्र समूहों और अन्य को अवगत कराते रहते हैं।

आलम यह है कि अधिकतर युवा चैटिंग, ऑरकुटिंग को छोड़ अब ब्लॉगिंग में ज्यादा रुचि ले रहे हैं। युवाओं का मत यह है कि ब्लॉग्स और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर हर दिन, हर पल कुछ नया होता है जबकि चैटिंग और ऑरकुट पर मनोरंजन तक ही बातें सिमटकर रह जाती हैं।

स्थान एक, विचार अनेक
ब्लॉगिंग से हम अपने दोस्तों के विचारों से नियमित रूप से जुड़े रहते हैं। यह कहना था बीए के स्‍टूडेंट अंशुल का। वे कहते हैं कि आमतौर पर ऐसा संभव नहीं हो पाता है क्योंकि चैटिंग, ऑरकुटिंग से सामाजिक मुद्दों पर तो बात नहीं हो सकती। ब्लॉग्स द्वारा ये सारी बातें संभव हो जाती हैं। एक नहीं अनेक विचार एक ही स्थान पर मिल जाते हैं।

अभिव्यक्ति का अधिकार
सभी को करना चाहिए ब्लॉगिंग। यह कहना था स्‍टूडेंट अभिषेक का। वे कहते हैं कि इससे संविधान द्वारा हमें जो अपने विचारों को अभिव्यक्ति देने का अधिकार दिया गया है, उसका हम इस्तेमाल तो कर पाएँ। अमूमन होता यह है कि किसी भी मुद्दे विशेष पर हम दोस्तों से बात कर भूल जाते हैं। ब्लॉग्स पर इन बातों को डिस्कस करने से कहीं न कहीं फर्क पड़ने की संभावना बनती है।

हर कोई पढ़ता है
स्‍टूडेंट आशीष कहते हैं कि इंटरनेट पर आप अनेक खबरें पढ़ते हैं, तो फिर उस पर प्रतिक्रिया देने के लिए किसी और माध्यम की क्या आवश्यकता है जब ब्लॉग्स हों। इंटरनेट ने हमें कई ब्लॉग्स दिए हैं जहाँ पर हम अपने विचारों को प्रस्तुत कर सकते है। इन्हें हर कोई पढ़ता है। इसलिए अपने स्तर पर मैं यह कोशिश करता हूँ कि ज्यादा से ज्यादा मुद्दों पर अपनी बेबाक राय दे सकूँ। इससे अपने दोस्तों के बीच भी एक बेहतर समूह बनता है।

यूनिटी बढ़ती है:
बीए की स्‍टूडेंट गरिमा यादव कहती हैं कि आज हर तरफ समाज में एकता की भावना को बढ़ाने की बात होती है। ब्लॉगिंग भी इसके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है क्योंकि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से यहाँ आपको एक ही विषय पर समान और असमान सोच वाले लोग मिलते हैं। ये आपसे जुड़कर ही निश्चित रूप से किसी भी स्थिति या परिस्थिति में बदलाव ला सकते है।

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विचारों को बाँटते हैं
रोहन शर्मा कहते हैं कि यूँ तो इंटरनेट माध्यम ही अपने विचारों को बाँटने का है, लेकिन ब्लॉगिंग इन सभी बातों को एक अलग ही रूप देता है। ब्लॉगिंग द्वारा आप किसी भी विषय-विशेष पर अपने विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। साथ ही एक-दूसरे से सतत जुड़े रहने के कारण बेहतर कार्यप्रणालियों को क्रियान्वित कर पाने की बात भी सीख जाते हैं। यह वैचारिक आजादी देता है।

जाहिर है, अब युवा ब्लॉग के जरिये न केवल अपने को अभिव्यक्त कर रहे हैं बल्कि एक-दूसरे को बेहतर जानने की कोशिश करते हुए एक-दूसरे से जुड़ भी रहे हैं। निश्चित ही इसके जरिये वे अपना गुस्सा भी जाहिर कर रहे हैं और अपनी रचनात्मकता को भी अभिव्यक्त कर रहे हैं। वे अपनी इस अभिव्यक्ति की आजादी को एन्जॉय कर रहे हैं।

ये हैं कुछ चर्चित ब्लॉगर्स :

अमिताभ बच्चन

आमिर खान

शाहरुख खान

करण जौहर

अभिषेक बच्चन

रामगोपाल वर्मा

मनोज वाजपेयी

नरेंद्र मोदी

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