आईआईएम, इंदौर के इतिहास में 29 मार्च का दिन एक खास दिन के रूप में दर्ज हो गया। सोमवार की शाम यहाँ ग्यारहवें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इसमें पीजीपी और ईपीजीपी विद्यार्थियों को डिग्रियाँ और श्रेष्ठ विद्यार्थियों को मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान 236 पीजीपी और 47 ईपीजीपी विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं।
मुख्य अतिथि मेरिको लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हर्ष मरीवाला थे। मरीवाला ने विद्यार्थियों से कहा कि सीखना एक ऐसी क्रिया है जिसका कोई अंत नहीं है और इसी सोच के साथ सदैव सीखते रहने की इच्छा हम में होना चाहिए तभी ज्यादा से ज्यादा सफलता हासिल हो सकती है। इसी कड़ी में डायरेक्टर एन. रविचंद्रन ने भी विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। जैसी शुरुआत वैसा अंत। कार्यक्रम की शुरुआत जिस तरह से कतारबद्ध प्रोसेशन से हुई थी, उसी तरह से इसका अंत भी हुआ। राष्ट्रगान की संगीतमय प्रस्तुति के बाद संस्थान के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर, फैकल्टीज और फिर विद्यार्थी कतारबद्ध तरीके से दर्शकों के बीच से निकले। यह नजारा देखने लायक था। जहाँ एक ओर सफलता की खुशी थी, वहीं दूसरी ओर इन साथियों को एक-दूसरे से बिछड़ने का गम भी था। काफी देर तक सभी एक-दूसरे के साथ और अपने परिवार के साथ फोटो खिंचवाते रहे।आईआईएम इंदौर गोल्ड मेडल फॉर स्कोलेस्टिक परफॉरमेंस का पहला गोल्ड मेडल गोयनका विशाल ओमप्रकाश को दिया गया जबकि दूसरा गोल्ड मेडल विशाल विश्वनाथन को दिया गया। तीसरा गोल्ड मेडल और बेस्ट वूमन पार्टिसिपेंट का गोल्ड मेडल बिजल रावल को दिया गया। गाउन पहने विद्यार्थियों के कतारबद्ध प्रोसेशन के रूप में शुरू हुए इस कार्यक्रम की भव्यता विद्यार्थियों को जीवनभर याद रहेगी। जब एक-एक करके विद्यार्थियों को डिग्री ग्रहण करने के लिए मंच पर बुलाया गया तो तालियों की गड़गड़ाहट उनकी दो साल की सफल कहानी बयाँ कर रही थी।