-मनीष शर्मा
एक सेठ के लड़के की नई-नवेली बहू ब्याह कर ससुराल आई। वह नए माहौल को समझने का प्रयास कर रही थी। एक दिन घर में घी आया। सास बोली- बहू, रोजमर्रा की जरूरत के लिए घी छोटे डिब्बे में निकाल लो।
घी निकालते समय कुछ बूँदें जमीन पर गिर गईं। इस पर सास बोली- बहू, नुकसान नहीं करना चाहिए। इसके बाद उसने नीचे गिरी बूँदों को उठाकर अपने शरीर पर मल लिया।
यह देखकर बहू हैरान रह गई। वह सोचने लगी कि मेरी कंजूस सास बड़ा नुकसान होने पर तो मुझे छोड़ेगी ही नहीं। ऐसे में मेरी इनसे निभेगी कैसे। लेकिन किसी फैसले पर पहुँचने से पहले उसने सोचा कि एक बार जाँच लूँ कि क्या मेरी सास वाकई कंजूस हैं?
उसने एक तरकीब सोची और सिर दर्द का बहाना करके लेट गई। सास ने पूछा तो बोली- माँजी, सिर दर्द से फटा जा रहा है। ऐसा लगता है अब बचूँगी नहीं। यह सुनकर सास परेशान हो उठी। उसने तुरंत डॉक्टर को बुलाया। लेकिन बहू को कोई फायदा नहीं हुआ।
अंततः बहू ने एक वैद्य का पता दिया और बोली- वही मेरा इलाज कर सकते हैं। वैद्य ने मरीज को देखकर कहा- इस दर्द का इलाज बहुत खर्चीला है। कोई कुछ कहता इसके पहले सास बोल पड़ी- वैद्यजी, आप खर्चे की चिंता न करें। पैसा मेरी बहू से बढ़कर नहीं है। मैं मितव्ययी हूँ, कंजूस नहीं। आप तो बस इलाज करें। सास की बात सुनकर बहू पानी-पानी हो गई। उसने तुरंत उठकर सारी बात सास को बताई और उन्हें गलत समझने के लिए क्षमा माँगी।
दोस्तो, किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले यह जरूर जाँच लेना चाहिए कि जैसा विचार आपके मन में उठा है, वह सही है या नहीं। जैसे कि उस बहू ने किया। लेकिन बहुत से लोग ऐसा नहीं करते। वे तो दूसरे पक्ष को जाने बिना किसी भी बात को गलत मानकर अपने मन में बैठा लेते हैं।
ऐसे लोगों से हम कहना चाहेंगे कि यदि किसी व्यक्ति के प्रति कोई नकारात्मक बात आपके मन में आई है तो उसे दिमाग में रखकर न बैठें। क्योंकि ऐसे में आपको उस व्यक्ति की सही बात भी गलत ही नजर आएगी।
इसलिए बेहतर यही है कि पहले क्रास चेक कर लें कि कहीं आप ही तो उलटा नहीं सोच रहे हैं। यदि आपने ऐसा करना शुरू कर दिया तो आप बहुत से उन तनावों से मुक्त हो जाएँगे, जो बेकार में आपको परेशान कर आपकी ऊर्जा को नष्ट करते हैं।
यह बात तब भी काम आती है जब आप किसी नए व्यक्ति के संपर्क में आते हैं। अकसर लोग सामने वाले को पूरी तरह जाने-समझे बिना उसके चरित्र और व्यवहार के बारे में निर्णय ले लेते हैं। यह तरीका गलत है। ऐसे में यदि आप अपने दिमाग में उसकी उलटी छवि बना लेंगे तो फिर वह हमेशा उलटा ही नजर आएगा।
इस तरह के लोग जीवन में अकसर परेशान रहते हैं। ऐसे लोग जब किसी नई संस्था में जाते हैं तो वहाँ के माहौल के साथ आसानी से सामंजस्य नहीं बैठा पाते। उन्हें छोटी-छोटी बातों में भी खामियाँ नजर आने लगती हैं। इसका सीधा नुकसान आखिर में इन्हीं को उठाना पड़ता है। इसलिए बेहतर यही है कि पहले वस्तुस्थिति को समझ लें ताकि बाद में किसी उलझन में न फँसें।
यही बात अपनी सास को न समझने वाली बहुओं पर भी लागू होती है। ससुराल में बहू जब नई-नई आती है तो नए वातावरण में वह डरी-सहमी रहती है। उसे लगता रहता है कि कहीं कोई गलती न हो जाए। वरना लोग क्या सोचेंगे।
वह बहुत असहज रहती है। ऐसे में गलती होने पर जब उसकी सास कुछ कह देती है तो उसकी असहजता उसे छोटी-सी बात को बड़े रूप में लेने पर मजबूर कर देती है और वह अपनी सास को अपना विरोधी मानने लगती है। ऐसे में बेवजह संबंधों में खटास पैदा हो जाती है। इसलिए बेहतर यही है कि किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले उस बहू की तरह सही-गलत को जाँच लें।
अंत में, आज 'मदर-इन-लॉज डे' है। सास भी माँ से कम नहीं होती। यदि आप उन्हें सम्मान देंगी तो वे भी आपको लाड़ करेंगी। यदि किसी गलतफहमी की वजह से आपकी अपनी सास से पटरी नहीं बैठ पा रही है तो आप उन्हें समझने की कोशिश करें। हो सकता है कि आपको संबंधों को सुधारने का कोई उपाय सूझ जाए। तो आपका आज का दिन है आपकी सास के नाम।