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मुझे चेंज चाहि‍ए...

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एमएसन युवा
- अनुराग तागड़े

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चेंज हर कि‍सी को अच्‍छा लगता है और हम हमेशा सोचते रहते हैं कि‍ लाइफ में कुछ चेंज होना चाहि‍ए। एक तरह की लाइफ स्‍टाइल हमें अच्छी नहीं लगती, बावजूद इसके ऐसे कितने लोग हैं, जो खुद को बदलाव के लिए तैयार करते हैं या फिर लगातार एक सरीखा काम करते-करते बोर हो जाते हैं और बदलाव के लिए कहीं से प्रेरणा लेते हैं।

दोस्तो! बदलाव ऐसा नहीं है कि खरीदा जा सकता है या फिर किसी से उधार लिया जा सकता है। यह स्वयं को ही करना पड़ता है। भले ही आप प्रेरणा लें, पर अंततः यह बदलाव आपको अपने आपमें ही लाना पड़ता है। दुनियाभर में कई कंपनियाँ हैं, जो लाभ कमाने के लिए बिजनेस करती हैं।

कई कंपनियाँ ऐसी हैं, जहाँ पर वर्षों से एक जैसा काम चल रहा है और वे लाभ भी अच्छा कमा रही हैं। लगातार लाभ कमाने के बावजूद कंपनियाँ एक जैसा नहीं चलने देतीं। वे स्वयं की ब्राडिंग के लिए विशेषज्ञों की सेवाएँ लेती हैं। कॉर्पोरेट वर्ल्ड में ऐसे कई उदाहरण हैं, जिसमें कंपनियों ने स्वयं को युवा बनाए रखने के लिए और खासतौर पर कुछ नया करने के उद्देश्य से ब्राण्ड लोगो से लेकर कंपनी की कार्यप्रणाली तक सबकुछ बदल डाला। अधिकांश इस प्रकार के नए प्रयोग करने वाली कंपनियाँ सफल रही हैं।

आप स्वयं ही कल्पना करें, लगातार एक जैसा काम करते-करते हम स्वयं भी बोरियत महसूस करते हैं और हमें भी ऐसा लगता है कि कुछ बदलाव होना चाहिए। कई बार हमें इस बदलाव में अपने आपको बदलते समय स्वयं के साथ वर्षों से चली आ रही कार्यप्रणाली को भी बदलना पड़ता है और यह सही भी है।

एक बंदर की सुंदर कहानी है। उसे एक दिन जंगल के पास लगे गाँव में एक घर के अंदर सुंदर आम नजर आते हैं। बंदरों को आम काफी अच्छे लगते हैं, लिहाजा जिज्ञासावश वह उस घर के भीतर घुस जाता है और आम के निकट पहुँच जाता है। आम इतने सुंदर रहते हैं कि देखते ही बंदर का मन डोलने लगता है और वह दोनों हाथों में एक-एक आम लेकर जंगल की ओर भाग जाता है।

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जंगल में जाने के बाद सबसे पहला काम करता है कि उसे चबाने की कोशिश करता है, पर वह टूटते ही नहीं। दरअसल आम लकड़ी के बने रहते हैं। बंदर काफी विचार करता है कि आम को फेंक दे, पर वे दिखने में इतने सुंदर रहते हैं कि उसे वह हाथ में रखता है।

एक दिन बीत जाने के बाद बंदर याद करता है कि उसने कुछ खाया भी नहीं, क्योंकि दोनों हाथों में लकड़ी के आम होने के कारण वह फलदार पेड़ों पर चढ़ नहीं पाता है। तीन दिनों में बंदर की हालत खराब हो जाती है, पर नकली आमों के प्रति उसका मोह कुछ छूटता नहीं। वह कमजोर हो जाता है और अंततः एक ऐसे पेड़ के पास आकर रुकता है, जहाँ पर स्वादिष्ट मीठे फल लगे रहते हैं।

बंदर को मीठे फलों की सुगंध आती रहती है, पर उसके हाथों में रखे नकली आमों के मोह के कारण वह असली फलों को नहीं खाता। आखिर जब बंदर मरणासन्ना अवस्था में पहुँच जाता है तब उसे एक वरिष्ठ बंदर समझाता है कि देखो इन आमों से मोह तुम्हें छोड़ना ही होगा वरना तुम मर जाओगे। काफी विचार करने के बाद बंदर लकड़ी के आमों को छोड़ता है और ताजे फलों का सेवन करता है।

दोस्तों! बंदर की कहानी यह कहती है कि कई बार कंपनियाँ और व्यक्ति दोनों ही अपने साथ ऐसी वस्तुएँ ढोती रहती हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं रहता, बल्कि वे नुकसान ही पहुँचाती हैं। ऐसी वस्तुओं का समय रहते त्याग कर ही देना चाहिए वरना वे व्यक्ति या कंपनी के स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती हैं।

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