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करियर
- अनुराग तागड़े

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रि‍एक्‍ट करना इंसान के नेचर में होता है। लेकि‍न कई बार हम एग्रेसि‍व होकर ऐसी रि‍एक्‍शन दे देते हैं, जो हमारे लिए ही नुकसानदेह साबित होती है। रि‍एक्‍ट जरूर करें लेकि‍न पहले थोड़ा समझ लें कि आपकी रि‍एक्‍शन का क्‍या असर हो सकता है।

कई बार हम सि‍चुएशन के अकॉर्डिंग रि‍एक्‍ट नहीं करते। या तो हम तत्काल प्रतिक्रिया दे देते हैं या फिर देते ही नहीं। ऑफिस हो या फिर दैनिक जीवन की बात हो हमारे सामना ऐसे लोगों से होता है जो नकारात्मक विचारधारा के होते हैं। वे लोग दुसरों की सफलता को पचा नहीं पाते और हरदम राजनीति के माध्यम से आगे बढ़ने की कोशिश में लगे रहते हैं।

इस प्रकार के लोगों से या तो संपर्क कम रखा जा सकता है परंतु यह प्रोफेशनल वर्ल्ड है और हमें सभी के साथ समान व्यवहार करना सिखाया जाता है। अकबर और बीरबल के बीच के संबंधों को हम सभी अच्छे से जानते हैं। बीरबल से कुछ दरबारी जलते थे और उसे हटाने की सोचने लगे। सभी ने मिलकर एक नाई को अकबर के पास भेजा।

उसने अकबर से कहा कि बादशाह मुझे कल रात सपने में आपके पिताजी नजर आए और वे कह रहे थे कि सबकुछ ठीक है बस बोरियत बहुत हो जाती है अगर अकबर किसी ऐसे इंसान को मेरे पास भेज दे जो न केवल होशियार व हाजिर जवाब हो बल्कि उसे सभी तरह का ज्ञान हो।

यह सुनकर अकबर सहित सभी का ध्यान बीरबल की ओर गया। अकबर ने कहा कि बीरबल आप मेरे लिए इतना तो कर ही सकते हैं। बीरबल ने मन में सोचा कि अभी किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देना आफत मोल लेना ही है। उसने कहा कि मुझे थोड़ा समय चाहिए। कुछ समय बाद बीरबल ने अकबर से कहा कि मैं कब्र में जिंदा दफन होना चाहता हूँ।

अकबर ने अनुमति दे दी। बीरबल ने कब्र के नीचे से अपने घर तक का रास्ता पहले ही बनवा लिया था। लगभग एक सप्ताह बाद बीरबल अकबर के दरबार में पहुँचा। बीरबल के दुश्मनों को लगा कि यह बीरबल का भूत है। बीरबल ने कहा कि बादशाह मैं आपके पिता से मिलकर आ रहा हूँ। उन्होंने काफी समय तक मुझसे बातचीत की पर बादशाह वे काफी परेशान हैं।

अकबर ने कहा कि क्यों? दरअसल वे अपनी दाढ़ी और बालों को लेकर काफी परेशान हैं। उन्हें वहाँ पर नाई की सख्त जरूरत है। अकबर ने यह सुनते ही नाई को वहाँ जाने का आदेश दे दिया।

दोस्तों इस छोटी सी कहानी से यह सीख मिलती है कि अपने बॉस की बात पहले सुन लें। इतना ही नहीं राजनीति करने वाले लोगों से भयभीत न हों और उन्हें अपने अच्छे काम के माध्यम से जवाब दें। सबसे पहले परिस्थिति को समझें और फिर उसके अनुसार अपनी प्रतिक्रिया को थोड़ा समय लेकर, चिंतन करने के बाद ही व्यक्त करें।

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