रिस्क तो लेना पड़ती है...
- अनुराग तागड़े
हमारा मन बड़ा ही अजीब होता है। वह किसी भी परिस्थिति को लेकर अलग-अलग तरह के विचार आपके सामने रख देता है। इनमें से कई विचार जोखिम भरे रहते हैं। इन विचारों की तरु हम ध्यान नहीं देते। सफल व्यक्ति वही होता है जो इस तरह के विचारों को भी ध्यान में रखता है और जब परिस्थितियाँ इस प्रकार की आती है तो उन्हें अमल में लाता है। यह बात सच है लेकिन इस जोखिम को उठाने की हिम्मत करना प्रत्येक के बस की बात नहीं है। इस कारण जोखिम उठाने के अवसर को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। जिंदगी में ऐसे कई मौके आते हैं जब आप जोखिम उठाने से पीछे हटे हैं और बाद में आप को यह एहसास होता है कि काश मैं उस समय सही निर्णय ले पाता। यह बात अक्सर सभी के साथ होता है। इस कारण सही समय पर सही जोखिम उठाने में कोई बुराई नहीं है और ना ही इससे आपके जॉब करियर पर असर पड़ेगा। कई बार केवल आलस के कारण हम जोखिम उठा नहीं पाते। हम दिनचर्या में ही छोटे से परिवर्तन को लेकर अनमने रहते हैं तब इतने बड़े परिवर्तन के लिए व्यक्ति तैयार नहीं रहता। पर इसके बावजूद अगर कोई सही समय पर जोखिम ले लेता है तब उसके परिणाम अच्छे ही मिलते हैं। आइए जानते हैं एक छोटी सी सत्य कहानी के माध्यम से कि किस प्रकार जोखिम उठाया जाता है। एक बार एक अंधा व्यक्ति सड़क किनारे खड़ा था। वह राह देख रहा था कि कोई आने जाने वाला उसे सड़क पार करवा दे। इतने में एक व्यक्ति ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा कि कृपया मुझे सड़क पार करवा दें मैं अंधा हूँ। पहले अंधे व्यक्ति ने दूसरे अंधे व्यक्ति का हाथ अपने हाथ में लिया और दोनों ने सड़क पार कर ली। दरअसल पहला अंधा व्यक्ति जाज पियानिस्ट जार्ज थे। उन्होंने अपने अनुभवों में यह बताया कि वह मेरी जिंदगी का सबसे खुशनुमा पल था जब मैंने एक अंधे व्यक्ति को सड़क पार करवा दी। उनके अनुसार जिंदगी में ऐसे मौके आते हैं। जब हमें जोखिम लेना पड़ता है और ऐसे समय जोखिम ले लेना चाहिए। इससे दूसरों पर निर्भरता भी घटती है और हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता है।