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सही होगा बजट तभी होगी बचत

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बजट बचत
ND
एक जंगल में रहने वाले संन्यासी की कुटिया में चूहों ने आतंक मचा रखा था। वह जो भी खाद्य सामग्री संभालकर रखता, चूहे उसे चट कर जाते। उसने खाद्य सामग्री को छीके में रखना शुरू कर दिया, लेकिन चूहे छलाँग लगाकर वहाँ भी पहुँच जाते। तंग आकर उसने एक दिन छीके की ऊँचाई बढ़ा दी और निश्चिंत होकर सो गया।

रात में अचानक जोर की आवाज सुनकर वह उठ बैठा। उसने देखा कि उसका छीका नीचे गिरा पड़ा है और चूहे गिरी हुई सामग्री खा रहे हैं। उसने गुस्से में चूहों मारना चाहा लेकिन वे फुर्ती से बिल में जा घुसे। अगले दिन जब वह भिक्षा लेकर लौटा तो देखा कि कुटिया में उसके गुरुजी बैठे हुए हैं। उसे उदास देखकर जब गुरु ने इसका कारण पूछा तो उसने अपनी समस्या उनके सामने रखी। गुरु बोले- असंभव! हम स्वयं यह दृश्य देखना चाहेंगे।

उस रात जब गुरु ने चूहों को छलाँग लगाकर छीका गिराते देखा तो वे आश्चर्यचकित रह गए। वे सोचने लगे कि आखिर इन चूहों में इतनी शक्ति आई कहाँ से? अचानक उनके मन में विचार आया। उन्होंने शिष्य से कहा कि इन चूहों के बिल को खोदो। शिष्य ने बिल खोदना शुरू कर दिया। थोड़ा गहरा खोदने पर बिल में उन्हें हीरे-जवाहरात से भरा एक मटका मिला।
  एक जंगल में रहने वाले संन्यासी की कुटिया में चूहों ने आतंक मचा रखा था। वह जो भी खाद्य सामग्री संभालकर रखता, चूहे उसे चट कर जाते। उसने खाद्य सामग्री को छीके में रखना शुरू कर दिया, लेकिन चूहे छलाँग लगाकर वहाँ भी पहुँच जाते।      


गुरु बोले- यही है चूहों की शक्ति का राज। ये धन की शक्ति से ही इतना उछल रहे थे। इसलिए अब तुम इस मटके को यहाँ से निकाल लो। जब इनके पास धन ही नहीं रहेगा तो ये इतना ऊपर नहीं उछल पाएँगे। इसके बाद वाकई चूहे कभी उतना ऊपर नहीं उछल पाए।

दोस्तो, यह है धन की शक्ति, जिससे कमजोर भी बलवान बन जाता है और जिसके अभाव में बलवान भी किसी काम का नहीं। इसी के प्रभाव से मूर्ख भी विद्वान नजर आता है, निंदनीय भी वंदनीय हो जाता है। इससे समाज में न केवल स्वयं की वरन परिवार की प्रतिष्ठा भी बढ़ती है।

इस बात से कौन इनकार करेगा कि हर आदमी आज इसके पीछे ही भाग रहा है, क्योंकि धन सुख, शक्ति, सुरक्षा, स्वतंत्रता आदि सभी कुछ देता है। और ऐसा कौन-सा इंसान है जिसे ये चीजें नहीं चाहिए। किसी व्यक्ति की सफलता भी धन से ही मापी जाती है। यानी जिसके पास जितना अधिक धन होता है, वह व्यक्ति उतना ही अधिक सफल कहलाता है। लेकिन धन क्या सिर्फ कमाने के लिए ही होता है? नहीं, कमाने के साथ इसका उपभोग भी करना चाहिए।

क्योंकि उपभोग नहीं करोगे तो कमाया हुआ धन किस काम का? लेकिन उपभोग की भी सीमा होनी चाहिए। सभी के लिए धन के उपभोग के साथ बचत भी जरूरी है। यदि आप अपनी आय से कम में निर्वाह कर रहे हों तो यकीन मानिए, आपके पास पारस पत्थर है जो जरूरत पड़ने पर आपको धन उपलब्ध करवा देगा, देता है।

इसलिए सेविंग करके अपना जीवन सेफ या सुरक्षित करें। क्योंकि जिनके पास बचत का पैसा होता है वे निश्चिंत होकर अधिक कुशलता से कार्य कर पाते हैं और ऊँचे से ऊँचे स्थान पर लटके लक्ष्य के छीके तक छलाँग लगाकर आसानी से पहुँच जाते हैं।

उनके पीछे बचत के धन की शक्ति जो होती है। कहा भी गया है कि जो धन खर्च भी करता है और बचाता भी है, वह सर्वाधिक सुखी होता है, क्योंकि वह दोनों तरह के आनंद भोगता है। इसलिए कमाओ जितना कि कमा सकते हो, बचाओ जितना कि बचा सकते हो और साथ ही दान भी करो। दान करोगे तो वह खाली नहीं जाएगा। वह किसी के काम आएगा और उसकी दुआ आपको मिलेगी।

दूसरी ओर, बहुत से लोग आमदनी कम होने के कारण बचत से बचते हैं। लेकिन यह सिर्फ बहाना होता है ऐसी स्थिति में भी बचत संभव है यदि खर्चों पर लगाम कसकर रखी जाए। यानी जिन चीजों के बिना आपका काम चल सकता है, उन पर धन व्यय न किया जाए। जब धन इकट्ठा हो जाए, तब खरीदा जा सकता है। सब कुछ संभव है। असल में हम अपना बजट ही नहीं बनाते।

बस बिना सोचे-समझे खर्च किए जाते हैं। यदि हम सोच-समझकर खर्च करें यानी अपनी आमदनी के अनुरूप महीने भर का सही बजट बनाएँ तो खर्चों पर निश्चित ही अंकुश लगेगा। इसलिए कल से शुरू होने वाले महीने का बजट आज ही बना लें। ध्यान रहे, आपको बचत भी करनी है। फिर देखो, कैसे नहीं बचता पैसा। अरे भई, डिस्टर्ब मत करो, बजट बना रहा हूँ। आज बजट का दिन जो है।

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