सफलता सभी को अच्छी लगती है। सफलता प्राप्त करने के बाद व्यक्ति गर्वित महसूस करता है और यहीं से आत्ममुग्धता का रास्ता भी खुलता है। अगर इस रास्ते पर चल पड़े तब व्यक्ति को स्वयं की बुराइयाँ या कमियों की तरफ ध्यान ही नहीं जाता। वह यह सोचने लगता है कि उसने जो प्राप्त किया है वह सर्वश्रेष्ठ है।
जो ज्ञान उसके पास है उससे बढ़कर उसे ज्ञान लेने की जरूरत ही नहीं है। ऐसे में कई बार जब नौकरी में प्रमोशन की बारी आती है तब किसी दूसरे को प्रमोशन देने के बाद व्यक्ति को एहसास होता है कि शायद स्वयं में कुछ कमी है। चलिए इसे एक छोटी कहानी के माध्यम से समझते हैं।
दो दोस्त कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद एक बड़े रिटेल स्टोर में नौकरी करने लगे। दोनों खूब मेहनत करते थे। दोनों समय से पहले पहुँचते थे और देर रात तक काम करते रहते थे। वहाँ खरीददारी करने वाले ग्राहकों से भी उनके अच्छे संबंध हो गए थे। दोनों को सेल्स रिप्रेजेंटेटिव का पद दिया गया था और उसी अनुसार उनका वेतन भी था।
लगभग दो वर्ष बाद स्टोर मालिक को लगा कि दोनों ने लगातार अच्छी मेहनत की है और उनका वेतन और पद में बढ़ोतरी करना चाहिए। स्टोर मालिक ने दोनों को बुलाया जिसमें से पहले दोस्त को कहा कि तुम्हें सेल्स रिप्रेजेंटेटिव ही रखा गया है और वेतन में दो हजार रु. की बढ़ोतरी की गई है। दूसरे को बुलाया और कहा कि तुम्हें स्टोर मैनेजर बनाया जाता है साथ ही पाँच हजार की बढ़ोतरी की जाती है।
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पहला दोस्त जब दूसरे से बातचीत करता है तब काफी दुःखी होता है कि वह मेहनत उतनी ही करता था बावजूद इसके उसका वेतन भी कम बढ़ा और पद भी नहीं बढ़ा। वह अपनी शिकायत लेकर स्टोर मालिक के पास जाता है।
स्टोर मालिक इस बात को लेकर पहले से तैयार रहता है। वह दोनों को अपने केबिन में बुलाता है और शिकायत करने वाले को बोलता है कि जाओ बाजार में यह पता करके आओ कि एक किलो तरबूज का क्या भाव है। वह बाजार में जाता है और वापस आकर बोलता है कि 20 रु. किलो। फिर स्टोर मालिक दूसरे को भेजता है।
वह आता है और कहता है कि 20 रु. किलो बिक रहा है और अगर ज्यादा संख्या में खरीदेंगे तो 15 रु. किलो भी मिल सकता है। जो व्यक्ति 15 रु. किलो में बेच रहा है उसके पास अभी 340 से ज्यादा तरबूज हैं जो काफी अच्छी गुणवत्ता वाले हैं। यह जवाब सुनकर पहला दोस्त दूसरे को बधाई देता है और अपनी कमजोरी समझ जाता है।
दोस्तों, यह बात जान लेनी चाहिए कि समय रहते अपडेट होना पड़ेगा और स्वयं को इस प्रतिस्पर्धा की दौड़ में आगे बढ़ाने के लिए नए ज्ञान को लेना ही होगा तभी तरक्की भी होगी। बदलाव को एक्सेप्ट करने में ही समझदारी है। अगर आप मेहनत पर विश्वास करते है तब यह और भी अच्छी बात है।
मेहनत सही दिशा में हो रही है या नहीं, इस बात की ओर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है जितना मेहनत करना। नौकरी में तरक्की ना होने को लेकर शिकायत करना काफी आसान काम है पर क्यों नहीं हो रही इसके बारे में भी एक बारगी सोचा जाना चाहिए। अगर आपने स्वयं की कमियों को जान लिया तब निश्चित रूप से उसमें सुधार करने का रास्ता भी अपने आप निकल जाएगा।