सोशल साइंस में अवसरों की कोई कमी नहीं है। शिक्षा और गैर सरकारी संगठनों के साथ काम करने के अलावा आप प्रशासनिक सेवा, मीडिया और कॉरपोरेट घरानों में भी अपने लिए नौकरी तलाश सकते हैं। नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग यानी के बीपीओ की डिमांड हाल के दिनों में काफी ज्यादा बढ़ी है और यहाँ इकोनॉमिक्स या मनोविज्ञान में ग्रेजुएट छात्र अपने लिए नौकरी प्राप्त कर सकते हैं।
सोशल साइंस के विभिन्न विषयों में समाजशास्त्र में जॉब ऑपरच्युनिटीज हाल के दिनों में सबसे ज्यादा बढ़ी हैं। एमए के बाद प्रशासनिक सेवा और रिसर्च इंस्टीट्यूट में प्रवेश पाने के लिए सोशल साइंस का यह सबसे बेहतर विषय है। मीडिया में भी इस विषय के जानकारों की काफी मांग है, क्योंकि वे समाज और उससे जुड़ी घटनाओं को दूसरों की तुलना में बेहतर तरीके से समझ पाते हैं और इन विषयों पर अपना पक्ष रखते हुए दर्शकों और पाठकों को उसके अनछुए पहलुओं से भी रू-ब-रू करवा पाते हैं।
समाजशास्त्र के छात्र एनजीओ के साथ भी काम कर सकते हैं। साथ ही वो समाज से जुड़े अन्य विषयों जैसे पर्यावरण, लिंगभेद आदि पर भी काम कर सकते हैं।
इसमें खास क्या है? समाज विज्ञान यह जानने के लिए जरूरी है कि जिन परिस्थितियों में हम रह रहे हैं उसकी विसंगतियों को दूर कैसे किया जाए। इसी तरह यह हमें अपने पारंपरिक मूल्यों व बाहरी दुनिया के बीच संतुलन बनाने एवं व्यक्तिगत व सार्वजनिक क्रियाओं को पूरा करने का विवेक भी देता है।
एक तरह से कहा जाए तो सभी तरह की नीतियों और रणनीतियों का संबंध मानव जीवन की उन्नति से जुड़ा होता है, इसलिए करियर के लिहाज से इस विषय का महत्व स्वतः ही बढ़ जाता है। मानव-सभ्यता, संस्कृति, सोसाइटी, जातीयता और सामाजिक संगठन आदि की जानकारी से हम अपने वर्तमान को अधिक बेहतर बना सकते हैं। इन सारे विषयों के बारे में बच्चों को शिक्षित कर उनका बेहतर समाजीकरण किया जा सकता है। इससे समाज में हमारी अपनी संस्कृञ्ति की तादात्मयता बनी रहती है।
यहाँ होती है पढ़ाई - जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली - टाटा इंस्टीट्यूट ऑड्ड सोशल साइंसेज, मुंबई - कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र - पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ - दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली - जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली - बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल - देवीअहिल्या बाई विश्वविद्यालय, इंदौर