| लम्हों को कैद करने की ताकत किसी में भी नहीं है। भले ही इतिहास अपने आपको दोहराता हो, लेकिन हूबहू उस शक्ल में नहीं हो सकता। लम्हों को कैद यदि किसी ने किया है तो वह है फोटोग्राफी। यह इंसानी फितरत का ऐसा करिश्मा है, जो आदमी को गुजश्ता दौर में ले जाता है। |
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