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बायोटेक्नोलॉजी
-डॉ. अनिलकुमा
बायोटेक्नोलॉजी, बायलॉजी और टेक्नोलॉजी का अनुसंधान आधारित विज्ञान मिश्रण है। इसमें बहुत से विषय समाहित रहते हैं जैसे- जेनेटिक्स, बायोकेमेस्ट्री, माइक्रोबायलॉजी, इम्युनोलॉजी, वायरोलॉजी, केमेस्ट्री और इंजीनियरिंग।

इसके अतिरिक्त यह हेल्थ, मेडिसिन, कृषि और पशुपालन, फसल चक्र और फसल प्रबंधन, इकालॉजी, सेल बायलॉजी, भू-विज्ञान और भू-संरक्षण, बायोस्टेटिस्टिक्स, प्लांट फिजियोलॉजी, सीड टेक्नोलॉजी आदि से भी संबंध रखता है।

बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग जीवित वस्तुओं विशेषकर उद्योग प्रक्रिया में सेल और बैक्टीरिया के लिए होता है। इस क्षेत्र में न केवल भारत, बल्कि विदेश में भी बायोटेक्नोलॉजिस्ट की बहुत माँग होने से बहुत संभावनाएँ हैं।

बायोटेक्नोलॉजी के बहुत से अनुप्रयोग चल रहे हैं, जिसमें विभिन्न मेडिसिन का डेवलपमेंट, वैक्सीन और डायग्नोस्टिक, उत्पादकता बढ़ाना, और उसका संरक्षण आदि शामिल है। बायोटेक्नोलॉजी के प्रयोग से पशुपालन के क्षेत्र में पशु प्रजनन की दर बढ़ी है। इसके उपयोग से बीज, कीटनाशक और उर्वरक की गुणवत्ता में वृद्धि हुई है। इनवायरनमेंटल बायोटेक्नोलॉजी से प्रदूषण नियंत्रण और बेस्ट मैनेजमेंट में भी मदद मिल रही है।

योग्यता और पाठ्यक्रम
यदि आप बायोटेक्नोलॉजी का कोर्स करना चाहते हैं तो आपकी पृष्ठभूमि विज्ञान होना आवश्यक है। यदि आप फिजिक्स, केमेस्ट्री, एग्रीकल्चर या बायलॉजी से इंटरमीडिएट हैं तो बीटेक या बीएससी बायोटेक्नोलॉजी में प्रवेश ले सकते हैं।

यदि साइंस, इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी या मेडिसिन से स्नातक हैं तो पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स एमएससी बायोटेक्नोलॉजी, एमएससी (एग्रीकल्चर) बायोटेक्नोलॉजी, एमवीएससी (एनिमल) बायोटेक्नोलॉजी, एमटेक बायोटेक्नोलॉजी, मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी, एमएससी-एमवीएससी वेटरनरी बायोटेक्नोलॉजी, एमएससी (मरीन) बायोटेक्नोलॉजी, एमटेक इन बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश ले सकते हैं।

यदि रिसर्च करना चाहें तो पीएचडी और पोस्ट डॉक्टरेट रिसर्च भी कर सकते हैं। आईआईटी दिल्ली व खड़गपुर भी संयुक्त प्रवेश परीक्षा के माध्यम से इंटीग्रेटेड एमटेक प्रोग्राम करवाते हैं जिसमें बारहवीं उत्तीर्ण (भौतिकी, रसायन व गणित सहित) विद्यार्थी भाग ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त जेएनयू नई दिल्ली, एम्स, जादवपुर यूनिवर्सिटी कोलकाता भी एमटेक कोर्स करवा रहे हैं।
स्रोत: नईदुनिया

करियर संभावनाएँ
बायोटेक्नोलॉजी न केवल एक विषय के रूप में तेजी से उभरा है, बल्कि इसे रोजगार के क्षेत्र में भी तेजी से बढ़ता क्षेत्र माना जा रहा है। रोजगार रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि इसमें भविष्य में बेहतर संभावनाएँ मौजूद हैं। बायोटेक्नोलॉजिस्ट फार्मास्युटिकल कंपनियों, केमिकल, एग्रीकल्चर और अन्य इंडस्ट्रीज में तो करियर बना ही सकते हैं, वे बायो प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज के प्लानिंग, प्रोडक्शन और मैनेजमेंट में भी बेहतर कार्य कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त वे रिसर्च लेबोरटरी (गवर्नमेंट व कॉर्पोरेट सेक्टर), यूनिवर्सिटीज व रिसर्च इंस्टीट्यूट में रिसर्च साइंटिस्ट व रिसर्च असिस्टेंट के रूप में कार्य कर सकते हैं। बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में आप रिसर्च साइंटिस्ट, टीचर, मार्केटिंग मैनेजर, साइंस राइटर, बायोइंफर्मिस्ट, फूड, केमिकल और फार्मास्युटिकल कंपनी में क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर या प्रोडक्शन इंचार्ज, एनालिस्ट या सेफ्टी स्पेशलिस्ट। बायोटेक्नोलॉजी कंपनियों में बिजनेस या मैनेजमेंट डिग्री प्राप्त कॉर्पोरेट एक्जीक्यूटिव की आवश्यकता भी रहती है।

भारत में बायोटेक्नालॉजी के क्षेत्र में कार्यरत कुछ प्रमुख कंपनियाँ जो बायोटेक्नालॉजिस्ट को रोजगार दे रही है वे है- बाइकॉन इंडिया लि., डॉ. रेड्डीस लैब, रिलायंस लाइफ साइंसेस, हिन्दुस्तान लीवर लि., थापर ग्रुप, इंडो-अमेरिकन हायब्रिड सीड्स, बीवकोल, आईडीपीएल, इंडिया वैक्सीन्स कार्पोरेशन, पेनेका बायोटेक, रेनबेक्सी, टोरेंट बायोटेक, केडियल एलेम्बिक, हिन्दुस्तान एंटीबायोटिक्स, नेशनल बॉटेनिकल इंस्टीट्यूट और टाटा इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट आदि।

वेतन
जहाँ तक इस क्षेत्र में वेतन की बात करें तो यह स्पष्ट है कि यहाँ वेतन योग्यता के आधार पर मिलता है जो जितना अधिक टेलेंटेड होगा उसे उतना ही अधिक वेतन मिलेगा। सब कुछ क्वालिटी पर निर्भर करता है। वैसे प्रारंभ में इस क्षेत्र में वेतन कम है पर अनुभव के आधार पर इसमें बढ़ोतरी होती रहती है।

भारत में भले ही इस क्षेत्र में पैकेज कम हो पर विदेश में इसमें अच्छा पैकेज मिलता है। हमारे पास बेहतर संसाधन और ट्रेंड मेनपावर उपलब्ध है जिसे बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कार्य का अनुभव भी है। हमारे यहाँ किसी अन्य देश के मुकाबले श्रम और संसाधन सस्ता है। हमारे पास बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध है जो एग्रीकल्चर आधारित बायोटेक्नोलॉजी के लिए उपयोगी है। यद्यपि हमारे यहाँ कई समस्याएँ हैं परंतु हम जानते हैं कि उनसे कैसे निपटा जाए। यह कहा जा सकता है कि बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हम कुछ देरी से आए फिर भी भारत में बायोटेक्नोलॉजी का भविष्य सुनहरा है।

विश्व में भारत के अलावा कोई दूसरा देश नहीं जो बायोटेक्नालॉजी के लिए विशिष्ट वातावरण दे रहा हो। भारत के पास विश्व का सबसे बड़ा क्षेत्र और समुद्री सीमा उपलब्ध है। हमारे पास कमसेकम सात मौसम क्षेत्र है। देश के अधिकतर क्षेत्र का तापमान बायो-टेक्नालॉजीकल प्रोडक्ट के लिए बेहतर परिणाम देने वाला है। पश्चिमी देशों की तुलना में गर्मी या ठंडक की लागत यहां कम है। देश के अधिकतर समुद्री क्षेत्रों में वर्ष में लगभग 340 दिन अच्छी घूप निकलती है जो समुद्री उत्पादों के लिए बेहद उपयोगी है।
स्रोत: नईदुनिया

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