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पं. अशोक पंवार 'मयंक'
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री अटलबिहारी वाजपेयी के जन्म वर्ष पर कई मतभेद हैं। कुछ लोग उनका जन्म वर्ष सन् 1926 का जन्म मानते हैं, जबकि कुछ 1924। यदि वर्ष 1924 पर आधारित कुण्डली का अध्ययन किया जाए तो निम्न परिणाम प्राप्त होते हैं।
अटलजी का जन्म ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को तुला लग्न में हुआ है, जिससे लग्न वर्गोत्तम हो रहा है। लग्न में स्थित तुला राशि का शनि 'शश योग' का निर्माण कर रहा है। यह योग व्यक्ति को उच्चाधिकार दिलाता है। शनि आपकी कुण्डली में चतुर्थेश एवं पंचमेश होने से सर्वाधिक योग कारक ग्रह बनता है। वैसे भी राजनीतिज्ञों की कुण्डली में चतुर्थ भाव या भावेश का सशक्त होना अति आवश्यक है। चतुर्थेश के उच्च राशिगत होने से जनता में लोकप्रिय बना रहा है। इस शनि की दशम पूर्ण दृष्टि दशम भाव पर पड़ रही है तथा वहां पर राहु की उपस्थिति राजनीति के क्षेत्र में ले जा रही है। राहु की महादशा सन् 1985 से आरम्भ हुई यह दशा आपको सन् 2003 तक रही।
इस दशाकाल में आप दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। तृतीय भाव में सूर्य, बुध, एवं गुरु की युति इस भाव तथा भाग्य भाव में फल की वृद्धिकारक है। द्वितीय भाव में चन्द्र, शुक्र की युति अति लाभकारी मानी जाती है। यह युति द्वितीय भाव में होने से भाषण कला में निखार लाती है। तुला लग्न होने से व्यक्ति के अंदर का कवि उजागर होता है।
शनि के इस राशि पर होने से आप के अंदर इस क्षमता का होना निश्चित होता है। धन भाव में दशमेश चन्द्रमा एवं लग्नेश शुक्र की युति पराशरीय नियम के अनुसार अति श्रेष्ठ मानी जाती है। इसी युति के कारण आपको प्रधानमंत्री पद की प्राप्ति हुई थी। राहु की महादशा में शुक्र की अंतरदशा में आपको दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला। शुक्र लग्नेश होने से शुभ फलदायक है। नवांश कुण्डली में यह शुक्र तुला राशि का होने से बली माना जा सकता है।