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मैडम मायावती

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मैडम पीएम मायावती मुख्यमंत्री
- पं. अशोक पंवार 'मयंक'

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उत्तरप्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री बनने वाली मैडम मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को कर्क लग्न मकर नवांश में दौलतपुऱ, उत्तरप्रदेश में हुआ। कर्क लग्न व राशि मकर होने से आप चतुर-चालाक, तुरंत फैसला लेने वाली महिला हैं। लग्नेश चंद्रमा लग्न को देख रहा है, वहीं चंद्र पर शनि की स्वदृष्टि भी आपको जनता का दर्द समझने की शक्ति प्रदान करती है।

मैं एक बार लखनऊ व इलाहाबाद गया था। कुछ लोगों ने बातचीत में बताया कि मायावती के शासनकाल में कम से कम अराजकता, गुंडागर्दी पर लगाम थी, वही बात आज उनके मुख्यमंत्री बनने पर पुलिस प्रशासन को गुंडागर्दी, आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश ‍दिया, वहीं कुछ को जो सुधरना चाहते हैं, उन्हें मौका दिया जाए, ये उनकी नरमदिली का जीता-जागता उदाहरण है। बार-बार मुख्यमंत्री बनना इनके लिए गुरु की कृपा भाग्येश होकर राज्यभाव पर मित्र दृष्टि पड़ने से हुआ। वक्त की नजाकत को पहचानते हुए आपने अगड़ों को भी साथ लेकर चुनाव लड़ा ‍िजससे उन्हें स्पष्ट बहुमत ‍िमला। ये भी गुरु व चंद्र का लग्न को देखना व शनि की दृष्‍टि संबंध से बना।

हालाँकि पहले बसपा केवल पिछड़ों में सिमटी थी। माया ने असफलता भी बहुत झेली। बार-बार मुख्यंमत्री पद से हटना या हटाया जाना, ताज कारिडोर प्रकरण में फँसावट पंचम भाव में स्वराशिस्थ मंगल के साथ शनि का विस्फोट योग और राहु नीच का बैठना भी कारण बना। चूँकि शत्रु भाव का स्वामी गुरु जो भाग्येश होकर षष्ठ भाव देख रहा है। इन्हें हर मुसीबतों से बचाने के लिए काफी है। इनके शासनकाल में प्रजा का सुखी होना, गुंडागर्दी से राहत पाना गुरु के चंद्र-सूर्य अमावस्या योग लेकर बैठे हैं, वहीं सप्तम भाव पर विस्फोटक शनि सूर्य को देख रहा है। यही कारण है विवाह न होने का। इनकी वाणी में स्पष्टता व कड़वाहट पर भी शनि सूर्य को देखने के कारण बना।

वाणी व स्वर भाव का स्वामी बुध, सूर्य, शनि दृष्ट है। अभी वर्तमान में शनि में मंगल का अंतर चल रह है। मंगल स्वराशि दशमेश होकर पंचम भाव में है जो विद्या बुद्धि का कारक है। इन्होंने अपनी चतुराई व अंगड़ों को मिलाकर सत्ता में स्पष्‍ट बहुमत हासिल किया। अगर यही नीति अपनाती रही तो प्रधानमंत्री की कुर्सी मायावती से दूर नहीं होगी।

आपको अपनी नीतियों, कुशल प्रशासन व भाग्योन्नति हेतु 10 कैरेट का पुखराज तर्जनी में शुभ मुहूर्त में बनवाकर शुभ समय में पहनना चाहिए। यह अत्यंत लाभकारी होगा।

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