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राहुल की राह आसान नहीं !

राहुल के सामने राह आसान नहीं बनने देगा शनि-मंगल का दृष्टि संबंध

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राहुल गाँधी कांग्रेस महासचिव
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PTI
हाल ही में कांग्रेस के महासचिव बने राहुल गाँधी का जन्म 19 जून 1970 को वृश्‍चिक राशि में हुआ। किसी भी जातक के बारे में जानने हेतु गोचर ग्रह व चंद्र लग्न से उसके वर्षफल के बारे में जान सकते है।

आपके पिता स्वर्गीय राजीव गाँधी देश के प्रधानमंत्री बने लेकिन 270 सांसद का समर्थन लेकर पहुँची श्रीमती सोनिया गाँधी को मायावती के समर्थन वापस लेने से प्रधानमंत्री की गद्दी से दूर रहना पड़ा। पुन: समर्थन मिलने पर भी भारी विरोध की संभावनाओं को देखते हुए गद्दी का मोह त्याग कर विपक्ष को करारा जवाब श्री मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनाने पर दिया।

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अब श्री राहुल गाँधी जो आज की युवा शक्ति के रूप में उभरते सितारे व भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखे जाने वाले हैं, को कांग्रेस का महासचिव बनाया गया है। देखें क्या कहते हैं उनके ग्रह क्योंकि आने वाले वर्ष में चार राज्यों ‍िदल्ली, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव होने को हैं।

आप अपनी योग्यता व युवा शक्ति को कितना प्रेरित कर कांग्रेस को लाभ पहुँचा सकते हैं। वैसे यूपी में कोई लाभ नहीं मिला बल्कि कांग्रेस बुरी तरह हारी। राशि से देखा जाए तो भाग्येश चंद्रमा हुआ जो नीच का है वही राशि स्वामी मंगल जहाँ बलि होना चाहिए वहाँ नीच के शनि से तृतीय दृष्‍टि से दृष्ट है। अत: अत्यधिक पराक्रम करने पर भी अच्छा लाभ नहीं मिल पाता जो यूपी के चुनाव में हमने देखा।


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आपकी पत्रिका में राहू कुंभ का है जो राशि से चतुर्थ भाव में है वही माता-भूमि-भवन-जनता से संबंधित भाव में बैठा है। वर्तमान में गोचर में भी कुंभ राशि में चल रहा है। इसी कारण माता के द्वारा पुत्र को महासचिव से नवाजा गया। वर्तमान गोचरीय शनि सिंह से भ्रमण कर रहा है व जन्म राशि से सिंह दशम भाव में है। उसकी सप्तम दृष्‍टि कुंभ पर पड़ रही है जो राशि से माता का भाव है। एक कारण यह भी रहा।

शनि प्रजासत्ता का कारक है तो राहू भी राजनीति का कारक है। इन दोनों ग्रहों का शुभ होकर राशि कुंडली में होना आगामी वर्षों के लिए शुभ होना अच्छा परिणाम देता लेकिन आपकी पत्रिका में शनि नीच का होकर षष्‍ठ भाव में राशि कुंडली से बैठा है जो विपक्षियों से काफी कड़े संघर्षों के बाद भ‍ी अच्छे परिणाम नहीं देता, ठीक राहू भी शनिवत प्रभावी रहेगा। आपकी कुंडली में एक भी ग्रह राजयोग कारक नहीं है। फिर भी वृश्चिक राशि होने से आपमें साहस अच्छा रहेगा लेकिन स्पष्टवादिता कुछ नुकसानदेह हो सकती है।
2008 में 4 राज्यों के चुनाव होने को हैं व संभव है ‍लोकसभा के चुनाव भी 2008 में हो जाएँ। ऐसी स्थिति में आपको युवा शक्ति को अभी से जागृत करना होगा व विपक्षियों को उनकी चाल से ही मात देनी होगी।
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गुरु का वृश्‍चिक राशि से गोचरीय भ्रमण कुछ राह‍त भी देगा। जो नवंबर से धनु से पूरे वर्ष भ्रमण करेगा। 2008 में 4 राज्यों के चुनाव होने को हैं व संभव है ‍लोकसभा के चुनाव भी 2008 में हो जाएँ। ऐसी स्थिति में आपको युवा शक्ति को अभी से जागृत करना होगा व विपक्षियों को उनकी चाल से ही मात देनी होगी तभी जाकर आप सफल हो सकते हैं, नहीं तो यूपी जैसे परिणाम के लिए तैयार रहना चाहिए।

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