- पं. अशोक पंवार 'मयंक'
फिल्म 'रॉकी' से अपने फिल्मी जीवन को आरम्भ करने वाले अभिनेता संजय दत्त का जन्म 29 जुलाई 1959 को मुंबई में वृश्चिक लग्न तथा कर्क नवांश में हुआ। कर्क लग्न में मंगल की उपस्थिति लग्नेश को नीच बना रही है। जन्म लग्न के अनुसार तो लग्नेश बली है परन्तु नवांश कुण्डली में नीच राशि में होने से इन्हें सदा पीड़ित ही कर रहा है। नवांश कुण्डली में सूर्य भी नीच राशि का होकर दशम भाव को देख रहा है, जिसके कारण आपका फिल्मी कॅरियर भी एक जैसा नहीं चल पा रहा है तथा काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं।
कुण्डली में दशम भाव में शुक्र का होना तथा लग्नेश मंगल से युति फिल्मों से संबंध दर्शा रही है। दशम भाव में मंगल का शुक्र से संबंध साहसपूर्ण भूमिकाओं में इनकी सफलता को दर्शा रहा है। नवम भाव में सूर्य बुध की युति 'बुधादित्य योग' का निर्माण कर रही है। इस योग के कारण इन्हें भारी संकटों से जूझने में सहायता मिल रही है। पंचम भाव में केतु की उपस्थिति राहु व मंगल की दृष्टि संतान सुख में कमी अवश्य लाती है।
जन्म के समय सूर्य की दशा भोग्य थी, जो मई 1963 तक रही। भाग्येश चंद्रमा की दशा सन् 1973 तक रही तदुपरान्त लग्नेश मंगल की दशा आरम्भ हुई। इस दशा की अन्तिम अन्तर दशा में आपने फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। राहु की महादशा सन् 1980 से लेकर मई 1998 तक रही। इस दशा ने आपको फिल्मी कॅरियर में मिश्रित ही फल प्रदान किए। इस अवधि में आपने 'नाम', 'सड़क', 'साजन', 'खलनायक' जैसी हिट फिल्में प्रदान कीं, तो दूसरी ओर दशा के आरम्भ में नशीली दवाओं के सेवन से फिल्मों में विशेष ध्यान नहीं दे पाने से असफल भी रहे। इसी दशाकाल में संजय को अवैध हथियार रखने के जुर्म में दो बार जेल भी हुई। इन दोनों घटनाओं के समय राहु में शुक्र की अन्तर दशा चल रही थी। शुक्र कुण्डली में सप्तमेश एवं द्वादशेश होने से अशुभ फल प्रदान करने वाला हो रहा है।
यह शुक्र दशम भाव में अपने शत्रु सूर्य की राशि में स्थित होने से और अशुभ फल प्रदान कर रहा है। द्वादश भाव में गुरु होने से उस भाव को कमजोर माना जा सकता है। गुरु जिस स्थान पर बैठता है, उसे कमजोर बनाता है। इसके चलते ही विरासत में अभिनय को प्राप्त करने वाले इस कलाकार को और जेल की सजा सुनाई गई।