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chhath ki aarti : छठ मैया की प्राचीन आरती

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जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए। 
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥ 
 
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय। 
ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥जय॥ 
 
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए। 
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥ 
 
अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए। 
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
 
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय। 
शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥जय॥ 
 
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए। 
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥ 
 
ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए। 
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥ 
 
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय। 
सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए॥जय॥
 
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए। 
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

 

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