रायपुर। विधानसभा चुनाव में वाहन लगाना उनके मालिकों को अब महँगा नहीं पड़ेगा। इस बार अधिक किराया मिलेगा। परिवहन विभाग ने पिछले चुनाव के मुकाबले 40 से 70 फीसदी किराया बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। राज्य में करीब डेढ़ लाख हल्के वाहन के अलावा 550 बसें व 32 हजार भारी वाहन भी हैं।
प्रदेश में 20 हजार 952 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों तक मतदान दलों को पहुँचाने के लिए प्रथम चरण के चुनाव में लगभग सवा लाख वाहनों की जरूरत पड़ेगी। प्रेक्षक, सेक्टर ऑफिसर, माइक्रो ऑब्जर्वर व अन्य अधिकारियों के लिए अलग से वाहनों की व्यवस्था करनी पड़ेगी। यहाँ सरकारी परिवहन सेवा नहीं है, इसलिए निजी वाहनों का ही इस्तेमाल ज्यादा होगा। निर्वाचन आयोग ने इसकी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। आम तौर पर चुनाव कार्य के लिए कोई वाहननहीं देना चाहता।
ऐसी स्थिति में कलेक्टर के आदेश पर निजी वाहनों का अधिग्रहित किया जाता है। आनाकानी करने पर वाहनों के लाइसेंस रद्द व जुर्माना आदि की कार्रवाई की जाती है। मालिक खुद अपना वाहन चुनाव कार्य में लगाए, इसके लिए इस बार वाहनों का किराया बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक टैक्सी व कार आदि हल्के वाहनों का किराया 50 से 60 प्रतिशत, लक्जरी वाहनों का 75 प्रतिशत तथा बसों का किराया 40 से 50 प्रतिशत बढ़ेगा। यह प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जा चुका है। वाहनों के पेट्रोल-डीजल की भी व्यवस्था की जाती है।(नईदुनिया)