परिवारवाद का पलड़ा
भाजपा-कांग्रेस में दावेदार बिगाड़ सकते हैं गणित
रायपुर। बस्तर जिले की भानपुरी सीट परिसीमन के बाद विलोपित हो गई है। इसकी जगह नई सीट बस्तर बनाई गई है। बस्तर में अभी चुनावी रंग चढ़ा नहीं है, लेकिन कहीं-कहीं यह चर्चा जरूर है कि किसे टिकट मिल रहा है। और कौन सशक्त प्रत्याशी हो सकता है? नई सीट में 140 गाँव हैं, जिनमें से जगदलपुर तहसील की 34 पँचायतें हैं। इनके अलावा भानपुरी विधानसभा की 67 गाँव शामिल हुए हैं। शेष करपावंड राजस्व मंडल के गाँव हैं। इस विधानसभा में 1.89 लाख मतदाता हैं, जिनमें 1.24 लाख आदिवासी हैं। 'नईदुनिया' संवाददाता ने बस्तर, सरगीपाल, सरनापाल, पिपलावंडी, सिवनीगुड़ा सहित दर्जनभर गाँवों का निरीक्षण किया।
इन गाँवों में सड़क, पानी की सुविधाएँ अपेक्षाकृत संतोषजनक हैं। लोग चुनाव में विकास और भ्रष्टाचार को मुद्दा मान रहे हैं। ग्रामीण का कहना है कि लाखों-करोड़ों खर्च करने के बाद भी बस्तर और यहाँ के आदिवासियों की स्थिति दयनीय है। इसे लेकर उनमें असंतोष है। गाँवों और बाजार में चुनाव का कोई माहौल नहीं है। आदिवासी अपनी दिनचर्या में व्यस्त हैं। उनमें राजनीति को लेकर कोई रुचि नहीं दिखाई दी। उनके लिए क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं होना चुनावी मुद्दा है।
वर्चस्व की लड़ाई : भानपुरी सीट विलोपित होने के बाद बस्तर सीट बनी है। भानपुरी सीट से बलीराम चार बार विधायक रह चुके हैं। पिछले चुनाव में उनके बेटे केदार कश्यप ने जीत दर्ज की। बस्तर नई सीट बनने के बाद भानपुरी नारायणपुर विधानसभा में शामिल हो गया है। इसलिए केदार कश्यप वहाँ से दावेदारी कर रहे हैं। नारायणपुर से विक्रम उसेंडी विधायक हैं। परिसीमन में उनका अधिकांश क्षेत्र नई सीट अंतागढ़ में शामिल हो गया है। इस लिहाज से नारायणपुर सीट में भाजपा के ठोस दावेदार नहीं है।
बलीराम कश्यप नारायणपुर के साथ-साथ बस्तर सीट अपने बेटे के लिए माँग रहे हैं। उनके दूसरे बेटे दिनेश कश्यप बस्तर पर दावा कर रहे हैं। इस वजह से पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष है। जगदलपुर सीट सामान्य होने के बाद वहाँ के विधायक बस्तर सीट से टिकट का दावा कर रहे हैं। वे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष हैं। दिनेश कश्यप 1990 में जगदलपुर सीट से विधायक रह चुके हैं। 1993 में उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दी, तो उन्होंने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा था।
कांग्रेस में भी घमासान : बस्तर में परिसीमन से भानपुरी की जो 67 गाँव शामिल हुए हैं उनमें कांग्रेस की अच्छी पकड़ मानी जाती है। भानपुरी से अंतुराम कश्यप दो बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने चार बार विधायक रहे बलिराम कश्यप को पटखानी दी थी। इसलिए कांग्रेस से बस्तर सीट पर उनका दावा सबसे पहले है। वहीं कांग्रेस से जिला अध्यक्ष लखेश्वर बघेल का नाम भी पैनल में है। बघेल पहले भाजपा में थे। अजीत जोगी ने उन्हें कांग्रेस में शामिल किया।
कार्यकर्ताओं में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता बघेल को सशक्त प्रत्याशी नहीं मानते। इस सीट में कांग्रेस के पूर्व विधायक झितरूराम बघेल का रूख भी प्रत्याशी की दिशा तय करेगा। लोगों का मानना है कि लखेश्वर, सुभाऊ और झितरूराम में मतभेद कांग्रेस को नुकसान पहुँचा सकता है। (नईदुनिया)