Publish Date: Sun, 12 Apr 2020 (18:21 IST)
Updated Date: Sun, 12 Apr 2020 (18:25 IST)
न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोरोना वायरस (Corona virus) महामारी के खतरे के बारे में चेताया गया था लेकिन वह वायरस की गंभीरता की अनदेखी करते रहे और उन संदेशों पर ध्यान देने की जगह अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करते रहे। यह बात अमेरिका के एक प्रमुख अखबार की खबर में कही गई है।
न्यूयॉर्क टाइम्स (एनवाईटी) में छपी खबर में खुलासा किया गया है कि खुफिया समुदाय, राष्ट्रीय सुरक्षा सहायकों और सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आने वाली महामारी और उसके परिणामों के बारे में चेतावनी दी थी लेकिन ट्रंप इस संकट को कमतर आंकते रहे।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा, यह खुलासा हुआ है कि राष्ट्रपति को संभावित महामारी के बारे में चेतावनी दी गई थी लेकिन आंतरिक बंटवारा, योजना की कमी और अपने स्वाभाविक-ज्ञान पर उनका भरोसा धीमी प्रक्रिया की वजह बना।
जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका दुनिया में सबसे बुरी तरह प्रभावित देश है जहां पांच लाख 30 हजार से ज्यादा कोविड-19 के मामले हैं और 20,608 लोगों की जान जा चुकी है। अखबार ने कहा, व्हाइट हाउस के शीर्ष सलाहकारों के साथ ही मंत्रिमंडल के विशेषज्ञों तथा खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी थी और कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिए आक्रामक कार्रवाई का अनुरोध किया था।
ट्रंप का नजरिया प्रशासन के अंदर चीन से निपटने के तौर-तरीकों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवादों से ओतप्रोत होने के साथ ही उनके इस संदेह पर भी आधारित था कि अधिकारियों को इसके लिए क्या प्रेरित कर रहा है। वह इसे डीप स्टेट (राज्य के अंदर ही अलग एजेंडे व नीतियों को लेकर राज्य) के तौर पर देख रहे थे।
इसके अलावा जन स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा की गई अनुशंसाओं को अक्सर आंतरिक चर्चाओं में आर्थिक व राजनीतिक विचारधाराओं से चुनौती मिलती थी जिससे फैसले लेने में और देरी हुई। न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर में कहा गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारियों को जनवरी के शुरू में चीन के वुहान से नए वायरस से संभावित खतरे को लेकर चेतावनी मिली थी।
खबर में कहा गया,विदेश मंत्रालय के महामारी विशेषज्ञों ने शुरू में चेतावनी दी थी कि यह वायरस महामारी में बदल सकता है जबकि डिफेंस इंटेलीजेंस एजेंसी की एक छोटी इकाई नेशनल सेंटर फॉर मेडिकल इंटेलीजेंस भी ऐसी ही निष्कर्ष पर पहुंची थी।
इसके हफ्तों बाद राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में जैव रक्षा विशेषज्ञों ने महामारी की परत-दर-परत जांच शुरू की कि आखिर वुहान में हो क्या रहा था और अधिकारियों से शिकागो शहर के बराबर के शहरों में पृथक वास की व्यवस्था करने तथा लोगों को घर से काम करने को कहने का अनुरोध किया।
इसमें कहा गया, कुछ शुरुआती चेतावनियों में लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लोग चीन को दोषी ठहराने में जुटे रहे और उन्हें अक्सर राष्ट्रपति के आर्थिक सलाहकारों का विरोध झेलना पड़ा जो ऐसे समय में चीन से रिश्ते बिगड़ने की आशंका को लेकर चिंतित थे जब ट्रंप बीजिंग के साथ व्यापार सौदे पर बातचीत कर रहे थे।
इसके बाद भी कई मौकों पर अधिकारियों ने ट्रंप को सामाजिक दूरी, घरों में रहने और घर से ही काम करने जैसे आक्रामक उपायों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ने का सुझाव दिया लेकिन बात बनी नहीं। (भाषा)