Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

कितना खतरनाक है Coronavirus का भारतीय वैरिएंट? विशेषज्ञों ने किया खुलासा

webdunia
  • facebook
  • twitter
  • whatsapp
share
मंगलवार, 27 अप्रैल 2021 (20:54 IST)
नई दिल्ली। कोरोनावायरस ने देश में हाहाकार मचा रखा है। इस बीच विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोनावायरस (Coronavirus) का भारतीय स्वरूप ब्रिटिश स्वरूप के समान ही तेजी से फैल सकता है लेकिन अभी तक इस बात के बहुत कम प्रमाण हैं कि यह मूल वायरस की तुलना में अधिक घातक है।
ALSO READ: Corona से कैसे जीती जाती है जंग? बता रही है यह बेटी, फेफड़ों में था 85% इंफेक्शन, फिर भी नहीं मानी हार
सार्स-सीओवी2 के बी.1.617 स्वरूप को दोहरा उत्परिवर्तन वाला या भारतीय स्वरूप भी कहा जाता है। यह स्वरूप महामारी की दूसरी लहर से बुरी तरह से प्रभावित महाराष्ट्र और दिल्ली में काफी मिला है।
ALSO READ: कानपुर : मुनाफाखोरों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस की अनोखी पहल, लगाए पोस्टर- 'हम आ रहे हैं'
दिल्ली और महाराष्ट्र में पिछले कुछ हफ्तों में कोरोनावायरस के मामलों में काफी तेजी आई है और स्वास्थ्य सेवा चरमरा गई है। दिल्ली के कई अस्पतालों में चिकित्सीय ऑक्सीजन की भारी कमी महसूस की गई है।

इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के निदेशक अनुराग अग्रवाल ने कहा कि जहां तक ​​हमारी जानकारी है, न तो ब्रिटिश स्वरूप और न ही यह बीमारी या मौत की बढ़ती गंभीरता से जुड़ा है। साबित हो चुका है कि ब्रिटिश स्वरूप तेजी से फैलता है और संभव है कि बी.1.617 स्परूप अधिक तेजी फैल सकता है, लेकिन यह (बी.1.617 स्वरूप का तेजी से फैलना) साबित नहीं हुआ है और इसे साबित करने के लिए कई लक्षण हैं और अध्ययन अभी पूरा नहीं हुआ है।
ALSO READ: रुला देंगी कोरोना काल की ये कहानियां : किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार...
आईजीआईबी देश भर की 10 प्रयोगशालाओं में से एक है जो वायरस के जीनोम अनुक्रमण में शामिल हैं। उन्होंने हालांकि कहा कि इस बात की कोई तुलना नहीं है कि किस स्वरूप की प्रसार क्षमता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के अनुभव को देखते हुए यह स्वरूप तेजी से फैलने वाला लगता है, लेकिन इसका साबित होना बाकी है। उनहोंने कहा कि सामान्य प्रमाणों को देखते हुए यह स्वरूप (बी.1.617) अधिक तेजी से फैल सकता है।

पिछले साल की पहली लहर की अपेक्षा इस बार राज्य में अधिक मौतों के बारे में पूछे जाने पर अग्रवाल ने कहा कि इसका सीधा संबंध इस बात से है कि स्वरूप कितना फैल सकता है और जितने अधिक मरीज संक्रमित होंगे, मृतकों की संख्या भी अधिक होगी।

नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (एनसीबीएस) के निदेशक सौमित्र दास ने कहा कि बी.1.617 स्वरूप के घातक होने के संबंध में अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं है। एनसीबीएस पश्चिम बंगाल के कल्याणी में स्थित है और यह कोरोना वायरस के जीनोम अनुक्रमण में शामिल 10 संगठनों में से एक है। दास ने पिछले हफ्ते एक वेबिनार में कहा था कि भारत में पाए जाने वाले विभिन्न स्वरूपों पर उपलब्ध टीके प्रभावी हैं। (भाषा)

Share this Story:
  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

webdunia
Corona से कैसे जीती जाती है जंग? बता रही है यह बेटी, फेफड़ों में था 85% इंफेक्शन, फिर भी नहीं मानी हार