Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

Omicron पर आई नई स्टडी, Delta से 70 गुना तेज फैलता है संक्रमण, लेकिन फेफड़ों को नुकसान कम

हमें फॉलो करें Omicron पर आई नई स्टडी, Delta से 70 गुना तेज फैलता है संक्रमण, लेकिन फेफड़ों को नुकसान कम
, गुरुवार, 16 दिसंबर 2021 (16:51 IST)
बीजिंग। दुनिया में कोरोनावायरस (Coronavirus) कोविड-19 के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) को लेकर खौफ है। इस वैरिएंट को लेकर कई स्टडी भी सामने आई है। इस बीच एक नई रिचर्स सामने आई है। कोरोनावायरस का ओमिक्रॉन स्वरूप, डेल्टा (Delta) और कोविड-19 के मूल स्वरूप की तुलना में 70 गुना तेजी से संक्रमित करता है लेकिन इससे होने वाले रोग की गंभीरता काफी कम है।

अध्ययन में इस बारे में प्रथम सूचना दी गई है कि ओमिक्रॉन स्वरूप किस तरह से मानव के श्वसन तंत्र को संक्रमित करता है। हांगकांग विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि ओमिक्रॉन, डेल्टा और मूल सार्स-कोवी-2 की तुलना में 70 गुना तेजी से संक्रमित करता है।

अध्ययन से यह भी प्रदर्शित होता है कि फेफड़े में ओमिक्रॉन से संक्रमण मूल सार्स-कोवी-2 की तुलना में काफी कम है, जिससे रोग की गंभीरता कम होने का संकेत मिलता है। अनुसंधानकर्ताओं ने ओमिक्रॉन का अलग तरह से संचरण होने और इससे होने वाले रोग की गंभीरता सार्स-कोवी-2 के अन्य स्वरूपों से भिन्न रहने को समझने के लिए 'एक्स-वीवो कल्चर' का उपयोग किया।
ALSO READ: Omicron को हल्के में न लें, पिछले सभी वैरिएंट के मुकाबले तेजी से फैल रहा है, WHO प्रमुख ने दी चेतावनी
यह पद्धति फेफड़े के इलाज के लिए फेफड़े से निकाले गए उत्तक का उपयोग करती है। हांगकांग विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर माइकल चान ची वाई और उनकी टीम ने ओमिक्रॉन को अन्य स्वरूपों से सफलतापूर्वक अलग किया तथा अन्य स्वरूप से होने वाले संक्रमण की तुलना मूल सार्स-कोवी-2 से की।
ALSO READ: क्या एक साल पहले से सक्रि‍य है Omicron Variant, उसे अब मिला अटैक का मौका?
टीम ने पाया कि ओमिक्रॉन मानव में मूल सार्स-कोवी-2 और डेल्टा स्वरूप की तुलना में कहीं अधिक तेजी से प्रतिकृति बनाता है। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि संक्रमण के 24 घंटे बाद ओमिक्रॉन स्वरूप ने डेल्टा और मूल सार्स-कोवी-2 की तुलना में करीब 70 गुना अधिक प्रतिकृति बनाई।
ALSO READ: सावधान! सिर्फ रात में दिखेंगे Omicron के ये लक्षण...
हालांकि ओमिक्रॉन ने मानव के फेफड़े की कोशिका में मूल सार्स-कोवी-2 वायरस की तुलना में 10 गुना से भी कम प्रतिकृति बनाई, जिससे पता चलता है कि इससे होने वाले रोग की गंभीरता कम है। चान ने एक बयान में कहा, यह जिक्र करना जरूरी है कि मानव में रोग की गंभीरता न सिर्फ वायरस की प्रतिकृति द्वारा निर्धारित होती है, बल्कि संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिरक्षा से भी निर्धारित होती है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

क्‍या है सारदा एक्‍ट और कैसे 12 से 14, 18 और फि‍र 21 हो गई भारत में लड़कियों की शादी की उम्र