Lockdown : प्रधानमंत्री सोमवार को मुख्यमंत्रियों से करेंगे वार्ता, आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने पर होगा जोर

रविवार, 10 मई 2020 (20:13 IST)
नई दिल्ली। लॉकडाउन चरणबद्ध तरीके से हटाने के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने पर जोर देने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार दोपहर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करेंगे। देश में कोरोना वायरस का प्रकोप शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री की मुख्यमंत्रियों के साथ यह पांचवीं बैठक होगी।
 
प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा (पीएमओ) ने कहा कि वीडियो कांफ्रेंस सोमवार दोपहर तीन बजे शुरू होगी। सरकार में मौजूद सूत्रों ने बताया कि बैठक में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने और कोविड-19 के ‘रेड जोन’ को ‘ऑरेंज जोन’ या ‘ग्रीन जोन’ में तब्दील करने की कोशिशें बढ़ाने पर बल दिया जाएगा। 
 
सूत्रों ने कहा कि बैठक में भाग लेने वाले सभी मुख्यमंत्रियों को बातचीत के दौरान अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा। प्रधानमंत्री द्वारा मुख्यमंत्रियों के साथ पिछली बार 27 अप्रैल को बातचीत किये जाने के बाद से कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है, जो लगभग 28,000 के आंकड़े से बढ़ कर करीब 63,000 पहुंच गई है।
 
बैठक के कुछ दिनों बाद केंद्र सरकार ने लॉकडाउन की अवधि और दो हफ्तों के लिये 17 मई तक बढ़ा दी। हालांकि, आर्थिक गतिविधियों में और लोगों की आवाजाही में कुछ छूट दी गई। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन 25 मार्च से लागू है।
 
कई राज्यों ने हाल ही में श्रम कानून के नियमों को उदार बनाया है, ताकि कार्यालयों/फैक्टरियों में अलग-अलग पाली (शिफ्ट) में काम कराने या सीमित संख्या में श्रमिकों के साथ औद्योगिक गतिविधियों में तेजी लाई जा सके।
 
सूत्रों के मुताबिक सोमवार की बैठक में लॉकडाउन चरणबद्ध तौर पर हटाने के तहत पाबंदियों में और अधिक छूट देने पर भी चर्चा हो सकती है लेकिन सारे प्रतिबंध एक ही बार नहीं हटाये जा सकते।
 
लॉकडाउन का तीसरा चरण 17 मई को समाप्त होने से कुछ ही दिन पहले यह बैठक होने वाली है। दूसरा चरण तीन मई को समाप्त हुआ था, जबकि पहला चरण 14 अप्रैल को समाप्त हुआ था।
 
रविवार को एक बैठक में राज्य के मुख्य सचिवों को कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने कहा कि कोविड-19 से बचाव की जरूरत है, पर आर्थिक गतिविधियों को भी सूझबूझ से तेज करने की जरूरत है।
 
लॉकडाउन के चलते विभिन्न राज्यों में फंसे हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर स्पेशल ट्रेनों से अपने-अपने गृह राज्य लौट रहे हैं, ऐसे में औद्योगिक गतिविधियों को फिर से शुरू करना राज्यों के लिये एक चुनौती साबित होगी।

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