- स्वरूप बाजपेयी
'माइकल वॉन की कप्तानी के दौर में इंग्लिश टीम की अपने मैदानों पर यह पहली श्रृंखलाई पराजय है और यदि हम वर्ष 2000 से अब तक के 8 इंग्लिश क्रिकेट सत्रों की बात करें तो यह दूसरा मौका है जब मेजबान टीम मेहमानों से टेस्ट श्रृंखला में पिटी है।'
2001 में नासिर हुसैन की टीम को स्टीव वॉ की ऑस्ट्रेलिया ने पाँच मैचों की श्रृंखला में 4-1 से हराया था और 2007 में राहुल द्रविड़ की कप्तानी में भारतीय टीम ने माइकल वॉन की इंग्लिश टीम से तीन मैचों की श्रृंखला 1-0 से छीनी है।
दरअसल पिछले आठ सत्रों में इंग्लैंड अपने मैदानों पर नासिर हुसैन एवं माइकल वॉन के नेतृत्व में ही मुख्य रूप से मेहमान टीमों से भिड़ती रही है। अपवाद स्वरूप ही किसी मैच या श्रृंखला में एलेक स्टुअर्ट, एम. एथरन, एम. ट्रैस्कोथिक, एंड्रयू फ्लिंटॉफ एवं एंड्रयू स्ट्रॉस टीम के कप्तान रहे हैं।
अतः यदि एरा की बात करें तो ये गुजरे आठ सत्र हुसैन एवं वॉन के ही रहे हैं और इंग्लैंड ने 16 टेस्ट श्रृंखलाओं में प्रतिद्वंद्वी टीमों का मुकाबला करते हुए 10 श्रृंखलाएँ छीनी हैं उनसे, 4 में बराबरी की तथा 2 श्रृंखलाओं में उसे शिकस्त मिली।
प्रत्येक टीम से इंग्लैंड ने श्रृंखला खेली है : वेस्टइंडीज से तीन, जिम्बॉब्वे से दो तथा पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, न्यूजीलैंड व बांग्लादेश से एक-एक टेस्ट श्रृंखला उसने अपने मैदानों पर जीती है। दक्षिण अफ्रीका से उसने बराबरी की है, पर भारतीय टीम को इस दौर में इंग्लैंड अपने मैदानों पर पराजित नहीं कर सकी है, 2002 में जब सौरव गांगुली टीम ले गए थे तब नासिर हुसैन थे इंग्लिश कप्तान और चार मैचों की श्रृंखला 1-1 से बराबर रही थी और पाँच वर्षों बाद राहुल द्रविड़, माइकल वॉन के विरुद्ध श्रृंखला जीत चुके हैं।
नासिर हुसैन की कप्तानी का दौर : हुसैन ने अपने नेतृत्व में इंग्लैंड में खेली गई 7 में से 4 श्रृंखलाओं में टीम को विजयी बनाया, पाकिस्तान (2001) व भारत (2002) के खिलाफ श्रृंखलाएँ 1-1 से बराबर रहीं, पर स्टीव वॉ की ऑस्ट्रेलिया से वे पार न पा सके। हुसैन ने 20 में से 10 टेस्ट इंग्लैंड के लिए जीते, 4 में पराजय मिली व 6 ड्रॉ रहे थे। स्टुअर्ट व एथरटन ने इस दौर में जिन चार मैचों में कप्तानी की उनमें से एक जीता व तीन में पराजय मिली।
माइकल वॉन का नेतृत्व दौर : यह दौर वि. दक्षिण अफ्रीका 2003 से वि. भारत 2007 तक का है जिसमें 9 श्रृंखलाएँ खेली गईं। 6 इंग्लैंड ने जीतीं, 2 बराबर रहीं और अभी-अभी द्रविड़ की टीम ने वॉन के नेतृत्व में श्रृंखला छीनी है।
माइकल वॉन ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2003 में 2-2 की बराबरी से अपना नेतृत्व जीवन आरंभ किया। इसके बाद लगातार तीन श्रृंखलाओं में 'क्लीन स्वीप' करने में वे कामयाब रहे। 2004 में न्यूजीलैंड (3-0) एवं वेस्टइंडीज (4-0) तथा 2005 में बांग्लादेश (2-0) इंग्लिश मैदानों पर खेले गए अपने सभी टेस्ट वॉन की टीम से हारे। वॉन के नेतृत्व की सबसे बड़ी सफलता 2005 में इंग्लैंड का पोंटिंग की ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से हराना रही।
2006 में वॉन कप्तान नहीं थे तो एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने श्रीलंका से श्रृंखला बराबर (1-1) की तो एंड्रयू स्ट्रॉस की इंग्लिश टीम ने पाकिस्तान को हराया (3-0)। स्वस्थ होकर वॉन पुनः इंग्लिश कप्तान बने व 2007 सत्र के पहले भाग में वेस्ट इंडीज को 3-0 से पराजित किया, पर दूसरे सत्र में इंग्लैंड में वे अपने कॅरियर की पहली चोट खा बैठे।
लॉर्ड्स के ड्रॉ के बाद नॉटिंगम में भारतीय टीम 7 विकेट से जीती और ओवल टेस्ट रहा ड्रॉ। इस तरह माइकल वॉन का नेतृत्व इंग्लैंड में पहली दफा नाकामयाब रहा। वॉन की कप्तानी के इस दौर में इंग्लैंड ने 32 टेस्ट खेलकर सिर्फ 5 हारे हैं, 20 में टीम को जीत मिली है जबकि 7 ड्रॉ रहे हैं।
2000 से अब तक खेले गए 56 में से 31 मैच इंग्लैंड द्वारा जीतना तथा खेली गई 16 श्रृंखलाओं में से मात्र दो में पराजय स्वीकार करना इस बात को प्रमाणित करता है कि इंग्लैंड, इंग्लैंड में बेहद ताकतवर है, पर भारतीय टीम ने उसके सुदृढ़ किले में सेंध लगाने का काम कर दिखाया है।