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'जम्बो' का जलवा बरकरार

कोटला पर कुंबले का कमाल

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भारत ‍पाकिस्तान क्रिकेट पहला टेस्ट
जब इनसान पर 'भाग्य की देवी' मेहरबान होती है तो सब अच्छा ही अच्छा होता चला जाता है। हिदुस्तान के अक्लमंद क्रिकेट के प्रशासकों ने जब कुंबले को कप्तानी का तोहफा दिया था तो टीकाकारों ने यह सवाल उठाए थे कि धोनी और गांगुली के ऊपर कुंबले को तरजीह क्यों? इसके बाद इन लोगों ने खुद को यह सांत्वना दी कि जम्बो की क्रिकेट से विदाई का इससे अच्छा तोहफा नहीं हो सकता, क्योंकि जम्बो वनडे को पहले ही अलविदा कह चुके थे।

टेस्ट क्रिकेट के अनुभवी और 119 टेस्ट में 573 विकेट के शिखर पर विराजित अनिल कुंबले की नेतृत्व क्षमता का परिचय कोटला के मैदान पर दिखाई दिया। भारत ने कुंबले के रूप में एक समझदार टेस्ट कप्तान के दीदार किए, जो आक्रामक नहीं होने के बावजूद अपनी अँगुलियों के जादू से पाकिस्तान को लोहा मनवाता रहा।

बल्लेबाजी में लक्ष्मण ने खुद को 'वेरी वेरी स्पेशल' साबित किया। मास्टर ब्लास्टर ने नाजुक मौके पर मैदान संभालने के बाद गांगुली को साथ लेकर एक अच्छी साझेदारी की जो भारत को छह विकेट से जीत दिलाने में मददगार साबित हुई। कोटला पर चार दिन के बाद पाँचवें दिन की सुबह के कुछ मिनट भारतीय टीम के अनुकूल रहे और यहाँ भारत लगातार सातवीं टेस्ट जीत दर्ज करने में कामयाब रहा।

कोटला से टेस्ट कप्तानी का आगाज करने वाले पेशे से इंजीनियर अनिल कुंबले का टीम के खिलाड़ियों के साथ तालमेल, आत्मविश्वास और गजब की समर्पण भावना का ही नतीजा था कि भारत तीन टेस्ट की सिरीज में 1-0 की बढ़त लेने में कामयाब रहा। कोटला पर फतह पाने के बाद उन्होंने कम से कम यह तो संदेश दिया ही कि चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा करके कोई गलती नहीं की।

भारत की जीत के जश्न को मनाने के साथ हमें पाकिस्तान टीम का भी विशलेषण करना जरूरी है। पाक की दिक्कत यह रही कि उसके सूरमा कहे जाने वाले बल्लेबाज यूनुस खान, पाक के आधुनिक ब्रेडमैन कहे जाने वाले मोहम्मद यूसुफ और धाकड़ बल्लेबाज शोएब मलिक बल्लेबाजी में कमाल नहीं दिखा सके। अलबत्ता तूफानी गेंदबाज शोएब अख्तर ने दूसरी पारी में चारों विकेट प्राप्त करके अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। यह अलग बात है कि दूसरे छोर से उन्हें साथ नहीं मिला।

मलिक ने इस टेस्ट में सिक्का जीतकर पहले बल्लेबाजी यह सोचकर चुनी थी कि चौथी पारी में जब विकेट जबरदस्त स्पिन ले रहा हो तो उन्हें बल्लेबाजी करने की जहमत उठानी नहीं पड़े, लेकिन चौथे दिन ही भारत टेस्ट को अपने कब्जे में कर चुका था और यह भी चौंकाने वाली बात रही कि भारत की दूसरी पारी के सभी चार विकेट तेज गेंदबाज की झोली में गए।

यह जरूर है कि भारत को 203 की जगह 303 का लक्ष्य मिलता तो यह मैच उसके लिए मुश्किल हो जाता, क्योंकि पाँचवें दिन तो पूरा खेल हुआ ही नहीं। पाकिस्तान की न तो बल्लेबाजी मुकाम पर है और न ही गेंदबाजी में ही कोई कमाल हैं। कप्तान शोएब मलिक कुछ ज्यादा ही दबाव महसूस कर रहे हैं। उनकी बल्लेबाजी कप्तानी के दबाव में दब गई है। डर है कि कप्तानी के दबाव की वजह से कहीं पाकिस्तान के इस जबरदस्त क्रिकेटर की प्रतिभा पर असर न पड़ जाए।

पाकिस्तान के खिलाड़ियों की बॉडी लेंग्वेज साफ बता रही थी कि सभी 11 खिलाड़ी खेल में अपना 100 प्रतिशत नहीं दे रहे हैं। हम इस बात को उनके वतन में लगे आपातकाल से भी जोड़कर देख सकते हैं। यकीनन खेलते वक्त भी उनके जेहन में कहीं न कहीं अपने परिजनों के कुशल होने की चिंता का भाव होगा।

जब आपके घर में आग लगी हो और आपसे कोई कहे कि खेलो, यह कैसे संभव हो सकता है। इनसान की रगों में खून दौड़ता है, उनके दिल में भी छोटा-सा दिल है और दिमाग में तरह-तरह के ख्यालात आना भी लाजमी है। जब आप मानसिक रूप से पूरी तरह खेलने के लिए तैयार ही नहीं हों तो कोई कैसे चमत्कार की उम्मीद कर सकता है?

जिस दौर से पाकिस्तान टीम गुजर रही है, उससे पहले उसने कभी भी इस तरह के हालातों का सामना नहीं किया। वह भी परदेस में रहकर। वह भी भारत जैसी टीम के खिलाफ। वह भी ऐसे में जहाँ क्रिकेट खेल नहीं होकर 'जंग' का मैदान बन जाता है। खुद खेलप्रेमी भी इस बात को महसूस करते हैं कि इस पाकिस्तान टीम में वह बात नहीं जो पहले हुआ करती थी।

यही कारण है कि वनडे में सिरीज की जीत का जश्न मैदान पर सिमटकर रह गया। दीपावली के बाद बचाकर रखे कुछ पटाखे ही फोड़े गए और कहीं भी दिलो-दिमाग को सुकून देने वाली जीत का अहसास नहीं हुआ। जब वनडे की भी यही हालत रही तो आप कैसे सोच सकते हैं कि पहले टेस्ट की जीत के बाद लोग तिरंगा थामे सड़कों पर जश्न मनाते नजर आएँ? हाँ, अखबारों के पहले पन्ने पर छोटी-सी खबर जरूर बनी कि भारत पहला टेस्ट जीत गया।

भारत को दो और टेस्ट खेलना हैं और इन दोनों में वह जीत नहीं दर्ज करता है तो यह हैरानी वाली बात होगी। इसमें कोई दो राय नहीं कि इंजमाम जैसी कुशल नेतृत्व क्षमता हासिल करने के लिए 'कूल' शोएब मलिक को लंबा सफर तय करना होगा।

सचिन, लक्ष्मण और गांगुली का फॉर्म में लौटना भारत के लिए शुभ संकेत है। भज्जी, जहीर की गेंदबाजी अपने शबाब पर है, ऐसे में उम्मीद की जाना चाहिए कि 30 नवम्बर से कोलकाता में शुरू हो रहे दूसरे टेस्ट का परिणाम भी कोटला की तर्ज पर निकले।

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