पाक टीम का आत्मविश्वास लौटा!
जयपुर में इंडियन ऑइल कप के पाँचवें मुकाबले में पाकिस्तान की जीत के साथ ही भारत का श्रृंखला में फतह का अंतर कम होकर 3-2 हो गया। किसी भी एकदिवसीय प्रतियोगिता में यह एक स्वाभाविक अंतर माना जाता है। इस अंतर को देखकर लगता है कि दोनों टीमों में काँटे का मुकाबला हुआ होगा, लेकिन जिन लोगों ने इस पूरी श्रृंखला को एक विश्लेषक की तरह देखा है, वे जानते हैं कि पूरी श्रृंखला में टीम इंडिया पाकिस्तान पर खेल के हर विभाग में हावी थी और ग्वालियर में खेले गए श्रृंखला के चौथे मैच में ही 3-1 की अपराजेय बढ़त लेकर पाकिस्तान के हौसले पस्त कर चुकी थी।
| एक आसान विकेट पर, जहाँ रन रोकना बहुत मुश्किल है, वहाँ फॉर्म में चल रहे हरभजन सिंह, आरपी सिंह और जहीर खान को एक साथ विश्राम देना समझ से परे है
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जयपुर एकदिवसीय मैच में भारतीय टीम मैनेजमेंट ने कुछ अतार्किक परिवर्तन करके पाकिस्तान की जीत की राह बनाई। एक आसान विकेट पर, जहाँ रन रोकना बहुत मूश्किल है, वहाँ फॉर्म में चल रहे हरभजन सिंह, आरपी सिंह और जहीर खान को एक साथ विश्राम देना समझ से परे है। इनमें से कोई एक गेंदबाज किसी बल्लेबाज की कीमत पर टीम में होना ही चाहिए था। इन तीनों की गैर मौजूदगी में पाकिस्तान तीन विकेट जल्दी गँवाकर भी दबाव से उबर पाया। इसके अलावा पाँचवें गेंदबाज की कमी भी पाकिस्तान के विशाल स्कोर में सहायक रही।इसके अलावा धोनी ने टॉस जीतकर पहले पाकिस्तान को बल्ला थमा दिया। जब भारतीय बल्लेबाजी अपने चरम पर है और दूसरी तरफ पाकिस्तान लक्ष्य का पीछा करने में असफल रहा है तो ऐसे में बल्लेबाजी के लिए अनुकूल विकेट पर पहले बल्लेबाजी करना बेहतर निर्णय साबित हो सकता था, लेकिन कप्तान धोनी की सोच कुछ अलग थी, जिस पर बाद में उनके खिलाड़ी अमल नहीं कर पाए।
| सवाल यह है कि इस प्रभावशाली बल्लेबाजी के बाद भारत के अगले एकदिवसीय मैच में (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ) रोहित को अंतिम ग्यारह में शामिल किया जाता है या फिर उन्हें बैंच पर बैठकर ही मैच देखना पड़ेगा
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प्रवीण कुमार ने अपने पहले एकदिवसीय मैच में गेंदबाजी करते हुए अच्छा अनुशासन दिखाया। रोहित शर्मा ने एक बार फिर दिखा दिया कि वे न केवल अच्छे बल्लेबाज हैं, बल्कि उन्हें दबाव में खेलना भी आता है। अब सवाल यह है कि इस प्रभावशाली बल्लेबाजी के बाद भारत के अगले एकदिवसीय मैच में (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ) रोहित को अंतिम ग्यारह में शामिल किया जाता है या फिर उन्हें बैंच पर बैठकर ही मैच देखना पड़ेगा।
भारत ने श्रृंखला 3-2 से जरूर जीत ली, लेकिन जयपुर में मिली जीत से पाकिस्तान का खोया हुआ आत्मविश्वास फिर लौट आया। जयपुर मैच से पहले पाकिस्तान के कप्तान शोएब मलिक अपने फॉर्म और कप्तानी को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे थे, लेकिन पाँचवें मैच में उन्होंने बेहतरीन बल्लेबाजी (82 गेंदों में 89 रन), उत्कृष्ट कप्तानी (सचिन तेंडुलकर के लिए खास फील्डिंग की जमावट, जिसके वजह से वे आउट भी हुए) और असरदार गेंदबाजी (रोहित शर्मा, महेंद्र सिंह धोनी और प्रवीण कुमार के विकेट) की।
मलिक ने टीम में जोश भर दिया, जिसकी वजह से पूरे श्रृंखला में साधारण प्रदर्शन करने वाले पाकिस्तानी गेंदबाज जयपुर में आसाधारण हो गए और फील्डिंग में भी सुधार हो गया।
क्रिकेट एक माइंड गेम है। कहते हैं कि क्रिकेट 70 प्रतिशत प्रतिभा और 30 प्रतिशत दिमागी खेल है। अगर किसी टीम को लगातार हराकर उसका मनोबल तोड़ दिया जाए तो फिर उसकी प्रतिभा दब जाती है। पाकिस्तान को श्रृंखला हराने के बाद अगर भारत जयपुर मैच जीत लेता तो पाकिस्तान का मनोबल बुरी तरह टूट जाता और फिर टेस्ट श्रृंखला उसका सामना बेहद आसानी से किया जा सकता था।
हालाँकि अब भी टेस्ट मैचों में भारत का पलड़ा भारी है और पाकिस्तान के लिए टेस्ट मैचों में दबाव बनाना बहुत मुश्किल होगा, लेकिन पाकिस्तान की मारक क्षमता जयपुर मैच के बाद जागृत हो चुकी है, खिलाड़ियों में फिर जोश है, टीम इंडिया को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।